पूर्वी तट पर सक्रिय हुआ ‘यश’ तूफान, पूर्वी उत्तर प्रदेश में होगा असर

उत्तरी अंडमान सागर व बंगाल की खाड़ी में हवा के दबाव से बन रहे आसार

लखनऊ। देश के पश्चिमी तट पर सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ताऊते का असर अभी पूरी तरह से खत्म ही नहीं हुआ कि पूर्वी तट पर ऐसी स्थितियां पैदा हो रही हैं कि आने वाले दिनों में ‘यश’ नाम का तूफान कहर बरपा सकता है। यह तूफान पूर्वी तट के प्रदेशों में जहां तेज हवा के साथ बारिश करेगा तो वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश भी इससे बच नहीं पाएगा। हालांकि यह तूफान कितना असरदायक साबित होगा इसकी जानकारी मौसम विभाग आगामी दो दिनों की बंगाल की खाड़ी में उपजी गतिविधियों के बाद ही देंगे। चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पाण्डेय ने गुरुवार को बताया कि देश के पश्चिमी तट पर ताऊते तूफान की तबाही के बाद अब पूर्वी तट पर एक नए तूफान की आहट सुनाई दे रही है। बंगाल की खाड़ी में हवा के दबाव से 22 मई या उसके बाद जो स्थितियां पैदा होंगी वे अगले 72 घंटों में तूफान (यश) का रुप ले सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो 26 से 27 मई तक यह तूफान ओडिशा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों में कहर बरपा सकता है।

विभाग के अनुसार दक्षिण पूर्वी मानसून 21 मई तक दक्षिण अंडमान सागर और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में पहुंचने वाला है। इन दोनों घटनाओं के अलावा मौसम सम्बंधी कुछ अन्य परिवर्तनों से 22 मई को पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तरी अंडमान सागर में निम्न वायु दाब की स्थिति बन रही है। इसके प्रभाव से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 22 से 23 मई के बीच हल्की मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश की सम्भावना है। ओडिशा, बंगाल, असम, मेघालय में 25 मई की शाम से कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। कुछ दूरदराज स्थानों पर तेज बारिश भी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि अप्रैल-मई में प्री मानसून बारिश के दौरान देश के पूर्वी और पश्चिमी तट पर अक्सर समुद्री तूफान आते हैं। बीते साल इसी दौरान पूर्वी तट पर सुपर साइक्लोन अंफन और पश्चिमी तट पर गम्भीर श्रेणी का तूफान निसर्ग कहर बरपा चुके हैं। इस साल पश्चिमी तट पर ताऊते तूफान ने तबाही मचाई तो अब पूर्वी तट पर जो स्थितियां पैदा हो रही हैं, उससे यश नाम का चक्रवाती तूफान कहर बरपा सकता है। यह उत्तर पश्चिम की तरफ बढ़ सकता है और 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल-ओडिशा के तटों तक पहुंच सकता है।

 

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