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सैन्य तख्तापलट और कोरोना से आर्थिक आपाताकाल के कगार पर म्यांमार

न्यूयार्क। म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद विश्वभर में फैली कोरोना महामारी ने देश को आर्थिक आपातकाल के कगार पर पहुंचा दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने सैन्य तख्तापलट और कोरोना महामारी को इसका कारण बताया है। संयुक्त राष्ट्र के विकास प्रोग्राम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार की लगभग आधी आबादी इस साल के अंत तक गरीबी की चपेट में आ जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक अगर म्यांमार की सुरक्षा और आर्थिक हालात स्थिर नहीं हुए तो 2.5 करोड़ लोग वर्ष 2022 तक गरीब हो जाएंगे। यह तादाद म्यांमार की कुल आबादी का 48 फीसद है। सैन्य तख्तापलट के बाद देश में खाने की बढ़ती कीमतों, आय और वेतन भत्तों में भारी कमी, बैंकिंग और स्वास्थ्य की मूलभूत सेवाओं में भारी गिरावट और सामाजिक सुरक्षा में कमी से लाखों लोग की आय गरीबी की रेखा (प्रतिदिन 1.10 अमेरिकी डालर या 81.51 रुपये की आय) के नीचे जाने वाली है। यह आर्थिक संकट महिलाओं और बच्चों की स्थिति को सबसे अधिक प्रभावित करेगा।

म्यांमार में इस तरह की गरीबी वर्ष 2005 से नहीं देखी है। तब यह देश पिछले सैन्य शासन में पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग था जबकि 15 साल पहले 2005 में म्यांमार की गरीबी दर 48.2 फीसद थी और 2017 में 24.8 फीसद गरीबी दर थी। यूएनडीपी प्रशासक आशिम स्टेनर ने कहा कि हम एक त्रासदी की तरफ जा रहे हैं। इस बीच म्यांमार में हजारों लोगों का सैन्य शासन के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन जारी है। यंगून और मेनडलेय शहरों में इन प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व बौद्ध भिक्षुओं ने किया। सिपाव नाम के कस्बे में प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को गोली मार दी गई।

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