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कोविड संकट को वायुसेना और नौसेना ने माना युद्ध जैसे हालात

चिकित्सा और रसद सामग्री का भंडारण करने के लिए तेज किए गए प्रयास

‘कोविड टास्क’ में लगे परिवहन विमानों ने देश-विदेश की 618 उड़ानें भरीं

नई दिल्ली। देश को मौजूदा कोविड संकट से उबारने के लिए वायु सेना और नौसेना ने ‘युद्ध जैसे हालात’ मानकर अपनी कोशिशें और तेज कर दी हैं। चिकित्सा और रसद सामग्री का भंडारण करने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। वायुसेना के परिवहन विमानों ने अबतक देश-विदेश की 618 उड़ानें भरी हैं। सोमवार की देर रात तक भारतीय वायुसेना के विमानों ने देश के विभिन्न भागों से 534 घरेलू और 84 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भरी हैं। वायुसेना ने 60 से अधिक विमानों और हेलीकॉप्टरों को ‘कोविड टास्क’ पर लगाया है। भारतीय वायुसेना ने इस ऑपरेशन को संचालित करने के लिए पालम एयर बेस पर कोविड एयर सपोर्ट मैनेजमेंट सेल बनाया है।

वायुसेना ने अपनी 534 घरेलू उड़ानों में देश के विभिन्न भागों से कुल 6,420 मीट्रिक टन की क्षमता के 336 ऑक्सीजन कंटेनरों, अन्य चिकित्सा आपूर्ति तथा उपकरणों को एयरलिफ्ट किया है। इसमें जामनगर, भोपाल, चंडीगढ़, पानागढ़, इंदौर, रांची, आगरा, जोधपुर, बेगमपेट, भुवनेश्वर, पुणे, सूरत, रायपुर, उदयपुर, मुंबई, लखनऊ, नागपुर, ग्वालियर, विजयवाड़ा, बड़ौदा, दीमापुर और हिंडन आदि शहर शामिल हैं। इसी तरह 84 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1,407 मीट्रिक टन की क्षमता के 81 क्रायोजेनिक ऑक्सीजन स्टोरेज कंटेनरों के साथ-साथ 1,252 खाली ऑक्सीजन सिलेंडर, 705 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ज़ीओलाइट (ऑक्सीजन का कच्चा माल) भी विदेशी मित्र देशों से लाकर भारत पहुंचाया है। यह उपकरण सिंगापुर, दुबई, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और इजराइल से खरीदे गए हैं।

इसी तरह भारतीय नौसेना ने कोविड संकट के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु-II लॉन्च करके 09 जहाजों को तैनात किया है। इसमें आईएनएस तलवार, आईएनएस कोलकाता, आईएनएस ऐरावत, आईएनएस कोच्चि, आईएनएस तबर, आईएनएस त्रिकंद, आईएनएस जलाश्व और आईएनएस शार्दुल को ऑक्सीजन कंटेनर, सिलेंडर, कॉन्सेंट्रेटर्स और संबंधित उपकरण विदेशी मित्र देशों से लाने के लिए तैनात किया है। नौसेना के जहाज आईएनएस ऐरावत, आईएनएस त्रिकंद और आईएनएस कोलकाता सोमवार को मित्र देशों से महत्वपूर्ण कोविड-19 चिकित्सा सामग्री के साथ वापस स्वदेश पहुंच चुके हैं। आईएनएस तलवार 05 मई 2021 को स्वदेश पहुंचा था।

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