राजनीति – The Lucknow Times https://thelucknowtimes.com Hindi News, Lifestyle & Entertainment Articles Thu, 14 Aug 2025 15:22:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 विकसित भारत के इंजन के रूप में आगे बढ़ेगा उत्तर प्रदेश : योगी https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149904/ Thu, 14 Aug 2025 15:22:10 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149904 विधानसभा में सीएम योगी-1

विधानसभा में विजन 2047 पर 24 घंटे से अधिक चली चर्चा पर मुख्यमंत्री का संबोधन, मुख्यमंत्री ने कहा- विकसित भारत में प्रदेश की भूमिका होगी निर्णायक, उत्तर प्रदेश केवल बड़ी आबादी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक-सांस्कृतिक नेतृत्व का केंद्र, 1947 से 2017 और 2017 से 2047 तक विकास यात्रा के दो चरणों पर मंथन, प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ संकल्प को धरातल पर उतारने का संकल्प, 187 विधायकों ने ली चर्चा में भागीदारी, सत्ता और विपक्ष दोनों का योगदान सराहनीय

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में विजन 2047 पर 24 घंटे से अधिक चली ऐतिहासिक चर्चा का समापन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि भारत विकसित तब बनेगा, जब हर राज्य अपनी भूमिका निभाएगा और इसमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहेगा। मुख्यमंत्री ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के 187 विधायकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि सभी ने गंभीरता और रुचिपूर्ण ढंग से बहस को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि 24 घंटे से अधिक चली यह चर्चा लोकतंत्र की शक्ति और सदस्यों की गंभीरता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य ही नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का ध्वजवाहक भी है। उत्तर प्रदेश सिर्फ बड़ी आबादी वाला राज्य नहीं, यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का केंद्र बिंदु है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2023 में लखनऊ में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश दुनिया के लिए ब्राइट स्पॉट है तो उत्तर प्रदेश भारत की ग्रोथ का ड्राइविंग फोर्स बनेगा।

यह यात्रा आत्मावलोकन का अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकांश सदस्य इस चर्चा में अपने विचार और विज़न को रखना चाहते थे, लेकिन समय और संसाधनों की सीमाओं को देखते हुए हमें चर्चा को आगे बढ़ाना है। इससे संबंधित व्यापक कार्यनीति तैयार करनी है और समाज से जुड़े सभी हितधारकों तक जाना है। उनसे बातचीत के बाद, एक विस्तृत चर्चा कर, सेक्टर-वार मुद्दों पर हम फिर सदन में आएंगे। यह चर्चा उन लोगों के लिए भी आंखें खोलने वाली है जो विधायिका और सदस्यों के आचरण पर उंगली उठाते हैं। प्रदेश और देश के लिए जब भी आवश्यकता पड़ी, हम सभी ने अपना योगदान दिया है और आगे भी देते रहेंगे। हम सबका सौभाग्य है कि देश अपनी आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर रहा है। स्वतंत्रता के 78 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। यह यात्रा आत्मावलोकन का अवसर है। मैं कई अवसरों पर इस 24 घंटे की चर्चा का हिस्सा बना। मैंने देखा कि सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य सभी माननीय सदस्यों ने इसमें गंभीर रुचि दिखाई। कुछ सदस्यों ने तो रातभर जागकर भी चर्चा में योगदान दिया, जिससे देश का भी ध्यान इस ओर गया।

दो भागों में चर्चा को बांटा
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या भारत विकसित होगा तो उसमें उत्तर प्रदेश का भी योगदान होगा। क्या उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अधिक नहीं होनी चाहिए? क्या वह खुशहाली का हिस्सा नहीं होना चाहिए? इन सवालों पर हमने दो भागों में चर्चा को बांटा— पहला, 1947 से 2017 तक हमने क्या हासिल किया, और दूसरा, 2017 के बाद से आने वाले 30 वर्षों का रोडमैप। 1947 से 2047 तक की यह 100 वर्षों की यात्रा में हमने क्या खोया और क्या पाया, इसका आत्मावलोकन करने का यह सबसे उचित समय है। प्रधानमंत्री जी ने जो विजन डॉक्यूमेंट देश के सामने प्रस्तुत किया, उसी के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने प्रारंभिक चर्चा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

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मोदी को भी पता है कि भाजपा के उज्जवल भविष्य हैं योगी आदित्यनाथ! https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/148107/ Mon, 07 Jul 2025 20:43:06 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=148107 रीना एन. सिंह

1998 में जब योगी आदित्यनाथ ने राजनीति में कदम रखा और 12वीं लोकसभा के दौरान सांसद चुने गए तब से लेकर अब तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा 1999, 2004, 2009, 2014 कुल मिलाकर पांच बार के सांसद योगी आदित्यनाथ जब 2017 में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब बहुत लोगों ने यह कहा कि उन्हें प्रशासनिक अनुभव नहीं है ऐसे लोगों को योगी आदित्यनाथ ने तब जवाब दिया जब वह 2022 में 25 करोड़ की जनसंख्या के प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने जिसने न केवल पांच वर्ष कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया बल्कि दोबारा हुए चुनाव में सफलतापूर्वक वापसी भी की देश को कई बड़े राजनेता देने वाले उत्तर प्रदेश में ऐसा कोई न कर सका। निश्चित रूप से जो सफर की शुरुआत करते हैं, वे मंजिल भी पा लेते हैं, बस एक बार चलने का हौसला रखना जरूरी है, शायद यही सोचकर वर्ष 1992 में 22 वर्ष के अजय सिंह बिष्ट ने सांसारिक जीवन को त्याग कर सन्यास आश्रम में प्रवेश किया और वह अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गए, सन्यास जीवन ग्रहण करने के बाद योगी ने घर और परिवार त्याग कर देश सेवा और समाज सेवा करने का संकल्प लिया।

मार्च 2017 में जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की घोषणा की गई तो हर कोई हैरान था। योगी आदित्यनाथ ने भारतीय राजनीति में एक नई पहचान बनाई है, जिसमें हिंदुत्व, विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर उनका आक्रामक और स्पष्ट दृष्टिकोण शामिल है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जो छवि बनाई है, वह उन्हें भविष्य में और भी बड़े राजनीतिक मंच पर स्थान दिला सकती है। कई विश्लेषक मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक भविष्य राष्ट्रीय स्तर पर और भी उज्जवल है, और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को और मजबूत होने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। योगी आदित्यनाथ की राजनीति केवल उत्तरप्रदेश तक सीमित नहीं रहने वाली है। जिस तरह से उन्होंने हिंदुत्व की धारा को भाजपा के एजेंडे के साथ समन्वित किया है, वह उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद, अगर कोई नेता भाजपा में सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वह योगी आदित्यनाथ हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वीकार करते हैं। उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक कद को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में वे प्रधानमंत्री पद के एक संभावित उम्मीदवार बन सकते हैं। उत्तरप्रदेश की जनता के बीच योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और उनके शासन के दौरान किए गए कार्य उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की ओर खींच रहे हैं। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि, अगर भाजपा योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाती है, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। उनकी लोकप्रियता का कारण न केवल उनके विकास कार्य हैं, बल्कि उनका साफ और पारदर्शी प्रशासन भी है। उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य में कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने और विकास को नई दिशा देने के कारण योगी आदित्यनाथ की छवि एक सक्षम नेता के रूप में उभर कर आई है। अगर भाजपा में सत्ता के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की बात हो या 2029 तक का राजनीतिक परिदृश्य देखें, तो योगी आदित्यनाथ का नाम प्रमुखता से उभर सकता है। उनके समर्थन में हिंदुत्व की विचारधारा, विकास का मॉडल, और राष्ट्रीय सुरक्षा का दृष्टिकोण है। इन मुद्दों पर उनका स्पष्ट और दृढ़ रूख भाजपा के मूल मतदाताओं के साथ उन्हें जोड़े रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री पद का दावेदार माना जा सकता है।

योगी की साधु

वाली छवि और उनकी कर्मठता उन्हें ओरों से अलग बनाती है। अगर वे दिल्ली पहुंचते हैं, तो उनका फोकस देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा पर चुनौतियों का सामना और धार्मिक ध्रुवीकरण के साथ-साथ विकास पर रहेगा। उनकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली यह दिखाती है कि वे केवल हिंदुत्व के मुद्दों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि समग्र विकास और भारत की वैश्विक छवि को भी प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, योगी आदित्यनाथ के लिए भविष्य में कई चुनौतियां भी होंगी। एक राष्ट्रीय नेता के रूप में, उन्हें केवल उत्तरप्रदेश नहीं, बल्कि पूरे देश के हर हिस्से में लोकप्रियता हासिल करनी होगी। इसके साथ ही, वे विभिन्न समाजों और जातियों को साथ लेकर चलने की चुनौती का सामना करेंगे। एक साधु और राष्ट्रवादी नेता के रूप में उनकी छवि मजबूत है, लेकिन एक प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें हर वर्ग और राज्य के विकास की जिम्मेदारी उठानी होगी। योगी आदित्यनाथ का भविष्य भारतीय राजनीति में न केवल उज्जवल दिख रहा है, बल्कि उनके लिए प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग, दिल्ली) तक पहुंचने की संभावना भी काफी प्रबल है। वे भाजपा के भविष्य के एक मुख्य स्तंभ बन सकते हैं, और अगर वे देश की बागडोर संभालते हैं, तो उनका शासन न केवल विकास, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बन सकता है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारत एक नए युग में प्रवेश कर सकता है, जहां धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक संतुलन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक एकता का मार्ग प्रशस्त होगा।

(लेखिका सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं।)

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MP : दिल के अरमा आंसुओं में बह गए, नरोत्तम मिश्रा खाली हाथ रह गए! https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147876/ Wed, 02 Jul 2025 08:44:13 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=147876 भोपाल : मध्य प्रदेश में भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। हेमंत खंडेलवाल के नाम की घोषणा हो गई है। 18 साल बाद कोई विधायक एमपी में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना है। हेमंत खंडेलवाल के पिता भी सांसद रहे हैं। इस रेस में कई लोगों के नाम आगे चल रहे थे। सबसे प्रबल दावेदार के रूप में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम था। माना जा रहा था कि नरोत्तम मिश्रा को इस बार पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी। दरअसल, नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारने के बाद लोकसभा चुनाव के दौरान काफी एक्टिव रहे थे। उन्होंने हजारों की संख्या में कांग्रेस नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिलवाई थी। साथ ही केंद्रीय नेतृत्व के नेताओं से लगातार मुलाकातें भी चल रही थी। इसकी वजह से रेस में उनका नाम था कि पार्टी के वे वरिष्ठ नेता हैं। मंगलवार को नामांकन के साथ ही नरोत्तम मिश्रा रेस से बाहर हो गए। बुधवार को पार्टी ऑफिस जब वह पहुंचे तो उनका चेहरा उतरा हुआ था।

अब नरोत्तम मिश्रा पर यह गाना बिल्कुल फिट बैठ रहा है कि दिल के अरमा आंसुओं में बह गए, नरोत्तम मिश्रा खाली हाथ रह गए। भाजपा ऑफिस में नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो उनका चेहरा उतरा हुआ था। साथ ही बॉडी लैंग्वेज यह बताने को काफी था कि यह मौका हाथ से निकलने का उनके मन में मसोस है। उतरे मन से वह पार्टी ऑफिस में पहुंचे थे। मंच पर बैठे नरोत्तम मिश्रा के मन में बेचैनी दिख रही थी। कभी भी उनके चेहरे पर चमक नहीं दिखी। गौरतलब है कि नरोत्तम मिश्रा एमपी में बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी अच्छे संबंध हैं लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद वह पद की उम्मीद में बैठे हैं। अब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।

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गांधी परिवार ने पाकिस्तान को खून और पानी पिलाया https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147405/ Sat, 07 Jun 2025 16:55:27 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147405/

गांधी परिवार की कार्यशैली पाकिस्तान को लाभ पहुंचाने वाली होने का आरोप लगाकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। कहा, पाकिस्तान के साथ हुआ सिंधु जल समझौता (आइडब्ल्यूटी) इसका स्पष्ट उदाहरण है। इस समझौते के तहत भारत के हितों को चोट पहुंचाते हुए पाकिस्तान को आर्थिक और जल संबंधी लाभ दिए गए।

दुबे ने की ये बात
एक्स पर पोस्ट अपने बयान में दुबे ने कहा, समझौते का प्रपत्र पढ़ने पर पता चलता है कि गांधी परिवार ने पाकिस्तान रूपी सांप को आजादी के बाद 77 साल तक देश का पानी और खून पिलाया, जबकि बदले में उसने भारतीयों की जान ली।

समझौते के तहत तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भारत का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान दिया, साथ ही पाकिस्तान को बांध और नहरें बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि भी दी। यह धनराशि वर्तमान मूल्य के अनुसार करीब 14 हजार करोड़ रुपये के बराबर थी।

गांधी परिवार की नीतियों के चलते सहना पड़ा बहुत कुछ
इसके बदले में भारत को दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद झेलना पड़ रहा है। यह सब गांधी परिवार की पाकिस्तान परस्त नीतियों के चलते हुआ, क्योंकि कांग्रेस और उसके द्वारा समर्थित सरकारों ने इस समझौते पर पुनर्विचार की कभी जरूरत ही नहीं समझी।

1960 में हुआ सिंधु जल समझौता
सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी पाकिस्तान को देने के लिए हुआ था। 22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने इस समझौते को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने का फैसला किया।

इसके बाद समझौते का मसौदा पढ़ने पर उसमें भारत के साथ हुए अन्याय की जानकारी मिली।

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Indian Air Force : सहारनपुर में वायुसेना के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147407/ Sat, 07 Jun 2025 16:55:27 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147407/

वायुसेना अपाचे हेलीकॉप्टर की यहां पर आज शाम को इमरजेंसी लैंडिंग से खलबली मच गई। इसमें सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं। सरसावा एयर फोर्स स्टेशन से तकनीकी टीम के आने तक पुलिस फोर्स मुस्तैद कर दी गई थी।

सहारनपुर के थाना चिलकाना क्षेत्र के गांव जोधेबांस में यमुना नदी के टापू पर शाम को वायुसेना के अपाचे हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है। हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के कारण इसे यमुना नदी में टापू पर उतारा गया।

इस बारे में जानकारी करने का प्रयास किया गया तो बताया गया तो किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। हेलीकॉप्टर में दो पायलट सवार थे। दोनों पायलटों ने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया, इतना ही नहीं नेम प्लेट भी छुपा ली थी।

उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर सरसावा एयर फोर्स स्टेशन से हथनीकुंड बैराज तक नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। हेलीकॉप्टर के यमुना नदी के टापू पर इमरजेंसी लैंडिंग की सूचना मिलने पर चिलकाना पुलिस तथा सहायक पुलिस अधीक्षक फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे ।

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कौन होगा BJP का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष ? इन तीन नामों को लेकर चर्चा तेज https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147409/ Sat, 07 Jun 2025 16:55:27 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147409/

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) संगठनात्मक मामलों, खास तौर पर अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। हालांकि पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है और औपचारिक प्रक्रिया जून के मध्य तक शुरू हो सकती है। भाजपा ने अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं, जो अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी संविधान के तहत एक आवश्यक पूर्व शर्त है।

सूत्रों का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है और औपचारिक प्रक्रिया जून के मध्य तक शुरू हो सकती है। भाजपा ने अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं, जो अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी संविधान के तहत एक आवश्यक पूर्व शर्त है।

उत्तर प्रदेश में 70 जिला अध्यक्षों की हाल ही में हुई घोषणा ने इस अटकल को और हवा दे दी है कि केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही भाजपा अध्यक्ष पद पर फैसला ले सकता है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर इस प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है। पार्टी सूत्रों ने कथित तौर पर संकेत दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति से पहले, भाजपा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सहित प्रमुख राज्यों में नए राज्य इकाई अध्यक्षों को अंतिम रूप दे सकती है।

मध्य प्रदेश में मौजूदा नेतृत्व संरचना में एक ओबीसी मुख्यमंत्री और एक ब्राह्मण राज्य अध्यक्ष है – एक संतुलन जो अब तक पार्टी के लिए काम कर रहा है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब राज्य प्रमुख के रूप में एक आदिवासी नेता को नियुक्त करने पर विचार कर रही है, क्योंकि वर्तमान राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व में आदिवासी प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। उत्तराखंड में, एक ब्राह्मण नेता को राज्य अध्यक्ष पद के लिए सबसे आगे बताया जा रहा है, हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

चर्चा में ये तीन नाम

ओडिशा के एक प्रमुख ओबीसी नेता, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जो अपनी संगठनात्मक कुशलता और केंद्रीय नेतृत्व से निकटता के लिए जाने जाते हैं, पार्टी के अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुख दिग्गजों में से एक हैं। शिवराज सिंह चौहान एक और शीर्ष दावेदार के रूप में उभरे हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अब केंद्रीय मंत्री, जमीनी स्तर के अनुभव वाले एक जन नेता के रूप में देखे जाते हैं। मनोहर लाल खट्टर, जो हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री की भूमिका से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं, निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं; इसलिए, उन्हें उन तीन बड़े नामों में से एक माना जा रहा है, जिनमें से भाजपा चुन सकती है।

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विदेशी सरजमीं से खुर्शीद का मैसेज; Article 370 के बयान पर क्यों घमासान? https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147312/ Tue, 03 Jun 2025 08:38:00 +0000 https://amarrashtra.com/?p=147312 कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को ऑल पार्टी डेलिगेशन के दौरे के बाद देश में भीतर मचे राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर चिंता जाहिर की है।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “जब हम आतंकवाद के खिलाफ एक मिशन पर हैं, ताकि दुनिया में आतंकवाद की पोल खोली जा सके। तब ये बात काफी तकलीफ देती है देश में बैठे लोग हमारी सियासी वफादारी का गुना-गणित कर रहे हैं। क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है?”

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर दिया था बयान
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने विदेश दौरे के बीच कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में बयान दिया था, इसके बाद सियासी बयानबाजी की शुरूआत हो गई थी। उन्होंने कहा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में कहा था, “जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद समृद्धि आई है। इसके साथ ही लोकतांत्रिक प्रगति भी हुई है.”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ये धारणा भी खत्म हो गई कि जम्मू कश्मीर भारत के दूसरे हिस्सों से अलग है। अब यहां एक लोकतांत्रिक सरकार है। लोगों ने यहां मतदान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद यहां विकास भी हुआ है, लेकिन कुछ लोग जम्मू कश्मीर को पुराने दौर में ले जाना चाहते हैं, लेकिन हम इसे फिर से ऐसा नहीं होने देंगे।
सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता

हम होंगे कामयाब’
बता दें कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने रविवार को आतंकवाद के खिलाफ भारत के इकट्ठे प्रयास और आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रतिक्रिया की दरकार को सबके सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर नकेल कस कर दुनिया भर में शांति और समृद्धि को बढ़ावा मिले।

उन्होंने कहा, “भारत एक स्वर से कह रहा है, ‘आतंकवाद अब और नहीं।’… हम दुनिया को शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक आवाज की उम्मीद करते हैं… हम भरोसे के साथ कह सकते हैं, ‘हम होंगे कामयाब’

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‘लड़की बहिन योजना’ में लगे गड़बड़ी आरोप पर क्या बोले डिप्टी सीएम अजीत पवार? https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147309/ Tue, 03 Jun 2025 08:35:20 +0000 https://amarrashtra.com/?p=147309 महाराष्ट्र सरकार की लड़की बहिन योजना में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। योजना के तहत प्राप्त आवेदनों का सत्यापन किए बिना लाभार्थियों को धन देने के कारण मामला जांच के घेरे में है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी स्वीकार किया है कि योजना में चूक हुई है।

अजीत पवार के इस बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पवार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर चुनावी लाभ हासिल करने के लिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। अजीत पवार ने कहा कि जब यह योजना लागू की गई थी, तब हमारे पास ज्यादा समय नहीं था। चुनाव की घोषणा हो गई थी, जिससे पात्रता की गहन जांच नहीं हो सकी।

जानिए क्या बोले अजीत पवार
उन्होंने कहा कि हमने पहले ही अपील की थी कि जरूरतमंद ही इसका लाभ लें। उन्होंने कहा कि अब जो पैसे दिए गए हैं। वो वापस नहीं लिए जा सकते, लेकिन इस पर उपाय जरूर निकाला जाएगा। लड़की बहिन योजना के लिए मानदंडमहाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2024 में लड़की बहिन योजना शुरू की थी। इसमें 21 से 65 वर्ष आयु की महिलाएं पात्र हैं।

ये महिलाएं इस योजना के लिए अपात्र
सरकार ने इस योजना के लिए सालाना आय की सीमा 2.5 लाख रुपये तय की थी, लेकिन जांच में 2,200 से अधिक सरकारी कर्मचारी भी लाभार्थी मिले हैं।

हालांकि, जिनके परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता, स्थायी सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी है या जो अन्य सरकारी वित्तीय योजनाओं से लाभ प्राप्त कर रहे हैं, वे अपात्र हैं। इसके अतिरिक्त, जिन परिवारों के पास ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन है, उस घर की महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

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सुवेंदु अधिकारी पर बड़ा दांव लगाने जा रही भाजपा! इशारों ही इशारों में अमित शाह ने दिया बड़ा संकेत https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147252/ Mon, 02 Jun 2025 09:42:52 +0000 https://amarrashtra.com/?p=147252 राजनीति में कई नेता इशारों ही इशारों में बड़ी बातें कह जाते हैं, जिसका मतलब कई बार बहुत बाद में समझ में आता है। अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बंगाल दौरे के दो दिन बाद ही कोलकाता पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह रविवार को नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन से इशारों में एक बड़ा संकेत दे गए।

इस सम्मेलन का नाम ‘विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया था, जिसमें प्रदेश भाजपा के सभी शीर्ष नेताओं से लेकर राज्य में पार्टी के सभी सांसद, विधायकों, जिलाध्यक्षों सहित 1,300 से अधिक मंडल अध्यक्ष मौजूद थे।

सुवेंदु अधिकारी को बताया प्रिय मित्र
अपने संबोधन की शुरुआत में ही जिस तरह से शाह ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को अपना प्रिय मित्र बताते हुए उनके विधानसभा में खड़े होते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भागने की बात कही यह एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

इसके बाद अब प्रश्न उठने लगे हैं कि क्या आगामी वर्ष की शुरुआत में राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में सुवेंदु को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर भाजपा मैदान में उतरने जा रही है? या फिर क्या सुवेंदु बंगाल भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष बनने जा रहे हैं?

2021 चुनाव से पहले हुए थे शामिल
मालूम हो कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले शाह ने ही सुवेंदु को भाजपा में शामिल कराया था। एक समय ममता के बेहद करीबी और बहुचर्चित नंदीग्राम व सिंगुर आंदोलन में उनके साथ रहने वाले सुवेंदु ने मंत्री व विधायक पद से इस्तीफा देकर दिसंबर, 2020 में शाह की मौजूदगी में अपने गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर में आयोजित सभा में भाजपा का दामन थाम लिया था। दोनों के बीच संबंध भी काफी अच्छे हैं।

भाजपा में शामिल होने के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में अपनी परंपरागत नंदीग्राम सीट से सुवेंदु ने तृणमूल सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसी कद्दावर नेता को हराकर रातों-रातों और सुर्खियों में आ गए थे। इस जीत के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा उनके प्रति और बढ़ गया।

बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव भी शेष
कार्यकर्ता सम्मेलन के मंच पर वैसे तो कई प्रमुख नेता, सांसद व विधायक मौजूद थे लेकिन शाह ने जिस तरह से सुवेंदु को अपना प्रिय मित्र कहते हुए संबोधित किया यह बहुत कुछ बता रहा है। आगामी कुछ दिनों में बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव भी होना है। सुवेंदु लगातार सक्रिय है और इस समय बंगाल भाजपा के प्रमुख चेहरा हैं। हालांकि, सांगठनिक स्तर पर पुराने भाजपाई और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी व सदस्य सुवेंदु को स्वीकार करते हैं या नहीं यह भी एक प्रश्न है।

बताते चलें कि अधिकारी परिवार का पूर्व मेदिनीपुर सहित आसपास के कई जिलों में खासा प्रभाव है। पिछले साल लोकसभा चुनाव में भाजपा राज्य में उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सकी और 2019 चुनाव के मुकाबले उसकी सीटों की संख्या भी 18 से घटकर 12 हो गई। हालांकि तृणमूल के पूरा जोर लगाने के बावजूद सुवेंदु के गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर की दोनों लोकसभा सीटों कांथी व तमलुक में भाजपा जीतने में कामयाब रही।

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संघ के मंच पर दिखेंगे इंदिरा गांधी के पूर्व मंत्री, RSS ने बनाया चीफ गेस्ट https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147249/ Mon, 02 Jun 2025 09:33:13 +0000 https://amarrashtra.com/?p=147249 पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक 83 वर्षीय अरविंद नेताम ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और जनजातीय समाज के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस देश का सबसे बड़ा वैचारिक संगठन है, जिसका उद्देश्य धर्म, संस्कृति और समाज का संरक्षण कर राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करना है।

दरअसल, रविवार को पत्रकार वार्ता में नेताम ने बताया कि आरएसएस जनजातीय समाज के कल्याण के लिए वनवासी कल्याण आश्रम जैसे प्रकल्प चला रहा है, लेकिन दोनों के बीच कई विषयों पर वैचारिक मतभेद हैं। जनजातीय समाज की भलाई के लिए विचारों का आदान-प्रदान आवश्यक है।

पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बने थे सांसद
नेताम, जो 1971 में कांग्रेस के टिकट पर कांकेर से पहली बार लोकसभा सदस्य बने थे, ने इंदिरा गांधी और नरसिम्हाराव की सरकार में मंत्री पद भी संभाला। 1998 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने बसपा, एनसीपी और भाजपा का दामन भी थाम लिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें पांच जून को नागपुर में आरएसएस के कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय वर्ग समापन समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

आरएसएस के मंच पर दिखेंगे पूर्व कांग्रेस नेता
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दो वर्ष पूर्व कांग्रेस से अलग हो चुके हैं और अब जनजातीय समाज के कार्यों में संलग्न हैं। नेताम ने कहा कि वह संघ के कार्यक्रम में सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से जनजातीय समाज की मांगों और समस्याओं पर चर्चा करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक उदारीकरण जनजातीय समाज के लिए हानिकारक साबित हुआ है।

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