सेहत – The Lucknow Times https://thelucknowtimes.com Hindi News, Lifestyle & Entertainment Articles Mon, 04 Aug 2025 08:37:50 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 बारिश के मौसम में स्किन केयर भी जरूरी ताकि बरकरार रहे चमक! https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149533/ Mon, 04 Aug 2025 08:18:49 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149533 खुशबू तिवारी

बारिश का मौसम आते ही गर्मी से तो राहत मिलती है लेकिन स्किन से जुड़ी कई समस्याएं भी बहुत तेजी से फैलती हैं। लगातार नमी, उमस और गंदगी की वजह से स्किन का स्वाभाविक संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे चर्म रोग का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्किन की देखरेख बहुत जरूरी होती है। इन द‍िनों त्‍वचा पर ऑयल का प्रोडक्शन बढ़ जाता है। इससे पोर्स बंद हो जाते हैं। ऐसे में मुं‍हासे न‍िकलना तो सबसे बड़ी समस्या होती है। इसके साथ ही बाहर ह्यूमिडिटी और अंदर एसी में रहने से स्‍क‍िन ड्राई होने लगती है।

स्किन विशेषज्ञों के मुताबिक, बरसात के मौसम में स्किन रैशेज, एक्जिमा, फंगल इंफेक्शन और अन्य समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में सेहत के साथ-साथ त्वचा का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है। बारिश में अगर त्वचा की देखभाल न की जाए, तो फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, एक्ने, खुजली और स्किन रैशेज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में स्किन को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए कुछ विशेष सावधानियां और हाइजीन टिप्स का पालन करना बेहद जरूरी है।

फंगल इंफेक्शन
बारिश के मौसम में कपड़े, जूते या शरीर का कोई हिस्सा गीला रह जाए तो वहां फंगस तेजी से पनपने लगता है। अक्सर यह जांघों, बगल, गर्दन और पैरों के बीच देखा जाता है। इससे तेज खुजली, लालपन और बदबू आदि का लक्षण होता है। ऐसे में इससे बचने के लिए शरीर को हमेशा सूखा रखें। सूती कपड़े पहनें और टाइट कपड़ों से बचें। नहाने के बाद पाउडर या एंटी-फंगल क्रीम का इस्तेमाल करें।

मुंहासे और एक्ने
बारिश के मौसम में त्वचा से जुड़ी समस्याएं होना आम बात है। बारिश में उमस और पसीना त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे एक्ने की समस्या बढ़ जाती है। जिन लोगों की त्वचा तैलीया होती है उन्हें मुंहासे और एक्ने की दिक्कत अधिक होती है। इसके अलावा गंदगी और धूल चेहरे पर जमकर संक्रमण को बढ़ाती है। इससे बचने के लिए दिन में 2-3 बार चेहरा धोएं। सैलिसिलिक एसिड युक्त फेसवॉश का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही ज्यादा मेकअप से बचें और हल्के मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।

स्‍क‍िन को रखें हाइड्रेट, हेल्दी डाइट लें
मानसून में सही मॉइस्चराइजर का चुनना जरूरी है। ऐसे में आपको ऑयल फ्री मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना सही रहेगा। ये बंद पोर्स को खोल देंगे। साथ ही स्‍क‍िन को हाइड्रेट भी रखता है। जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर इस मौसम के लिए बेस्ट होते हैं। ये आपकी त्‍वचा में नमी बनाए रखते हैं। स्किन को ग्लोइंग बनाए रखने के लिए आपको हेल्‍दी डाइट लेने की जरूरत है। ये कोलेजन काे बूस्‍ट करने का काम करती है। साथ ही आपकी स्‍क‍िन काे जरूरी पोषण म‍िलते हैं। ताजे फल और सब्जियों काे डाइट में शाम‍िल करने से आपकी स्‍क‍िन को भी फायदा म‍िलता है।

भीगने से बचें, साफ-सफाई का रखें ध्यान
मानसूनी बारिश से स्‍क‍िन इन्‍फेक्शन और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बारिश में भीगने से बचना चाह‍िए। मौसम देखकर बाहर जाने से पहले छाता या रेनकोट साथ रख लें। मानसून में इन्‍फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आप स्किन को साफ रखें और अच्छे से ड्राई करें। अगर आप मेकअप का इस्तेमाल कर रही हैं तो ब्रश को भी साफ रखें। द‍िन में कम से कम दाे बार फेस वॉश जरूर करें।

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Tips : गाल हो जाएंगे लाल, रोजाना खाएं टमाटर चार https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149387/ Sat, 02 Aug 2025 05:39:16 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149387 खुशबू तिवारी

लाल-लाल गाल चेहरे को सुंदर लुक तो देते ही हैं, साथ ही पूरी पर्सनालिटी को भी फ्रेश बना देते देते हैं। टमाटर की तरह लाल गाल पाने की ख्वाहिश हर लड़की की होती है। लाल गाल खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं, इसलिए तो मेकअप के दौरान लड़कियां गालों पर लाली लगाना नहीं भूलती हैं। अगर गालों को लाल करना है तो लाल टमाटर से अच्छी चीज कोई और नहीं हो सकती है। रोज लंच और डिनर में 4-5 टमाटर का सलाद खाएं। लगातार पांच हफ्तों तक बिना एक भी दिन भूले रोज टमाटर खाएं। इससे गाल लाल हो जाएंगे और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी। टमाटर के औषधीय गुण न केवल सेहत बल्कि त्वचा के लिए भी रामबाण का काम करते हैं। टमाटर हमारी सेहत और सूरत दोनों के लिए फायदेमंद होता है। रोजाना चार टमाटर खाने और लगाने से स्किन भी ग्लो करने लगती है।

पाचन सही कर बढ़ाता है सुंदरता

टमाटर को सलाद आदि में खाएं। यह हाजमा ठीक रखता। पेट साफ रहेगा तो त्वचा संबंधी समस्याएं भी नहीं होंगी। टमाटर का सेवन करने से आंखों की चमक और सुंदरता भी बढ़ती है। क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन-A आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है और आंखों की मसल्स को मजबूती देता है। टमाटर शरीर से टॉक्सिन हटाने का काम करता है, जो कि त्वचा को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। इस तरह टमाटर त्वचा क्लीन रखने में भी सहायता करता है। -माना जाता है कि यदि टमाटर खाने से पहले इसका ऊपरी छिलका और बीज निकाल दिए जाएं तो यह और अधिक प्रभावी होता है। हालांकि इस बारे में पुख्ता रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

सेहत के साथ सौंदर्य भी बढ़ाए

टमाटर देखने में जितना सुंदर होता है, खाने में उतना ही मजेदार। इसकी गिनती फल और सब्जी दोनों में होती है, इसी तरह यह भी सेहत और सौंदर्य में इजाफा करता है। इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा खिल उठती है और इसके कई कॉस्मेटिक फायदे हैं, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। टमाटर त्वचा पर सनस्क्रीन का काम करता है। यह सूर्य की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से स्किन को बचाता है. इसे रोजाना चेहरे पर घिसने से सनटैनिंग चली जाती है। टमाटर एक सिट्रस फ्रूट है। इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन के प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। हम सभी जानते हैं कि विटामिन-सी त्वचा के लिए कितना लाभकारी है। यह सनबर्न से बचाने में काफी मददगार साबित होता है।

टमाटर इतना प्राभावी होता कि यदि त्वचा पर लगातार उपयोग किया जाए तो आपको महंगी सनस्क्रीन क्रीम लगाने तक की आवश्यकता नही पड़ेगी। यह पूरी तरह नैचरल है और इसका कोई साइड इफेक्ट नही है। ड्राई स्किन वाले इसे प्रयोग में लाने के बाद चेहरे को मॉइश्चराइज जरूर करें। टमाटर ऑयली स्किन वालों के लिए औषधि का काम करता है. दरअसल टमाटर की खटास ही इसका सबसे बड़ा गुण है। वहीं इसे लाल रंग देने वाला लायकोपिन त्वचा पर एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। त्वचा को धूल- मिट्टी से होने वाले नुकसानों से बचस्त है। विटामिन-सी और विटामिन-ई होने के कारण यह त्वचा से अतिरिक्त सीबम के उत्पादन को नियंत्रित करता है।

बढ़ती उम्र का रोकता है असर

टमाटर समय से पहले चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों को रोकने में मददगार है। इसमें पाया जाने वाला लायकोपिन, केरिटीनॉइड्स क्रीम की तरह काम करता है। यह त्वचा की सेल्स को डैमेज होने से बचाता है। यह धीरे-धीरे आपके चेहरे को ग्लोइंग बनाता है। साथ ही उसमें कसावट लाने का काम भी करता है। मगर टमाटर को चेहरे पर लगाने के तुरंत बाद सनलाइट में न जाएं, आपको रिएक्शन होने की संभावना है। यह त्वचा के बंद पोर्स खोलकर ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स की प्रॉब्लम को कम करता है। टमाटर चेहरे पर एस्ट्रिंजेंट का काम करता है, टमाटर में मौजूद एसिडिक प्रॉपर्टीज कील-मुंहासे और काले दाग-धब्बों की समस्या को कम करती हैं। साथ ही स्किन को ग्लोइंग बनाती हैं। त्वचा पर टमाटर लगाकर डेड स्किन सेल्स को आसानी से हटाया जा सकता है। टमाटर डेड स्किन निकालकर त्वचा को साफ रखता है और त्वचा में नेचरल शाइन लाता है।

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Drink और स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है अकेलापन! https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149345/ Fri, 01 Aug 2025 07:11:16 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149345 इम्यूनिटी कमजोर और दिल की बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

नई दिल्ली : हाल ही में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अकेलापन और सोशल आइसोलेशन का हेल्थ पर उससे भी ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है जितना कि शराब पीने या स्मोकिंग से होता है. यह सिर्फ एक इमोशनल फीलिंग नहीं है, बल्कि एक गंभीर हेल्थ रिस्क फैक्टर बनकर सामने आया है. अकेलेपन से क्रॉनिक स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. कुछ स्टडीज तो यह भी बताती हैं कि अकेलापन दिन में 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक हो सकता है.

यही नहीं, अकेलेपन का सीधा लिंक डिप्रेशन, एंग्जायटी और कॉग्निटिव डिक्लाइन से पाया गया है. बूढ़े लोगों में तो यह डिमेंशिया का भी रिस्क बढ़ा सकता है. जो लोग अकेला महसूस करते हैं, उन्हें अक्सर नींद आने में दिक्कत होती है या उनकी नींद की क्वालिटी खराब होती है. इससे ओवरऑल हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ता है. इसके अलावा अकेले लोग अक्सर अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपना लेते हैं, जैसे कि कम फिजिकल एक्टिविटी, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स और कभी-कभी शराब या ड्रग्स का सहारा लेना, जिससे उनकी हेल्थ और बिगड़ जाती है.

102 साल के अमेरिकी डॉ. हॉवर्ड टकर ने वर्ल्ड के सबसे ओल्डेस्ट लिविंग फिजिशियन के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपनी जगह बनाई है. उनका मानना है कि शराब और धूम्रपान से भी ज्यादा खतरनाक एक आदत है “अकेलापन”. उनका कहना है कि अकेलापन हृदय रोग, डिप्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. वो कहते हैं कि अगर आपकी लाइफ में कोई पर्पस नहीं है, तो कोई भी मिरेकल डाइट या सप्लीमेंट आपको लॉन्ग लाइफ नहीं दे सकता. एक इंटरव्यू में, डॉ. टकर ने कहा कि रिटायरमेंट लॉन्गविटी का एनिमी है. उनके हिसाब से, लॉन्ग और सेटिस्फाइंग लाइफ का फॉर्मूला किसी पिल में नहीं, बल्कि पर्पसफुल लाइफ जीने में है.

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Health : टाइप-1 और 2 से खतरनाक है टाइप-5 डायबिटीज https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149338/ Fri, 01 Aug 2025 06:54:40 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149338 -खुशबू तिवारी

कहते हैं कि तंदुरुस्ती हजार नियामत है, सेहत ठीक है तो सब कुछ फिट है। आजकल की भागमभाग और तनावभरी जीवनशैली में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इनमें बीपी, शुगर तो आम बात है जो लगभग हर किसी को होता है। डायबिटीज के कई टाइप होते हैं, इनमें टाइप 5 डायबिटीज, जिसे मोनोजेनिक डायबिटीज या युवावस्था में मैच्योरिटी से शुरू होने वाला डायबिटीज कहा जाता है. ये डायबिटीज का एक रेयर और जेनेटिक फॉर्म है. ये टाइप 1 या टाइप 2 से डिफरेंट है. टाइप 5 डायबिटीज एक जीन में म्यूटेशन के कारण होती है, जो बॉडी में ब्लड शुगर के रेगुलेशन को अफेक्ट करता है. डायबिटीज विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-5 डायबिटीज यूजुअली टीनेज या अर्ली एडल्टहुड में अपीयर होता है, लेकिन इसके सिम्पटम्स दूसरे टाइप की डायबिटीज से सिमिलर होने के कारण इसे अक्सर टाइप 1 या टाइप 2 समझ लिया जाता है.

टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-5 डायबिटीज में अंतर
टाइप-1 डायबिटीज: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है. इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से पैन्क्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देती है. परिणामस्वरूप, शरीर बहुत कम या बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बना पाता.

टाइप-2 डायबिटीज: यह डायबिटीज का सबसे आम प्रकार है. इसमें शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता. यह अक्सर लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है, जैसे मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत खान-पान.

टाइप-5 डायबिटीज: जैसा कि ऊपर बताया गया है, इसका मुख्य कारण लंबे समय तक चला कुपोषण है, विशेष रूप से बचपन से ही अपर्याप्त पोषण. यह न तो ऑटोइम्यून है और न ही मुख्य रूप से इंसुलिन रेजिस्टेंस से संबंधित है. इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, लेकिन इसे मेडिसन से नियंत्रित किया जा सकता है.
किस वजह से होती है टाइप-5 डायबिटीज?

टाइप-5 डायबिटीज के लक्षण
टाइप-5 डायबिटीज के सिम्पटम्स हर सबटाइप के हिसाब से थोड़े डिफरेंट हो सकते हैं, लेकिन कुछ कॉमन इंडिकेटर्स हैं जो इसे पहचानने में हेल्प करते हैं. सामन्य तौर पर, पेशेंट्स में छोटी एज से ही ब्लड शुगर का लेवल हल्का से मॉडरेट बढ़ा हुआ दिखता है. सबसे इम्पोर्टेंट बात ये है कि इसमें ओबेसिटी या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे कोई सिम्पटम्स नहीं होते, जो कि टाइप-2 डायबिटीज में अक्सर दिखते हैं. इस कंडीशन का एक और बड़ा हिंट है फैमिली हिस्ट्री . अगर आपकी फैमिली में कई जनरेशंस से डायबिटीज चली आ रही है, तो MODY होने के चांसेस बढ़ जाते हैं. कुछ स्पेसिफिक MODY टाइप्स में बार-बार यूरिन आना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, थकान और बिना किसी खास रीज़न के वेट लॉस जैसे सिम्पटम्स भी दिख सकते हैं.

ऐसे करें बचाव और उपचार
टाइप-5 डायबिटीज एक जेनेटिक कंडीशन है, इसे प्रिवेंट नहीं किया जा सकता. हालांकि, फैमिली हिस्ट्री चेक और जेनेटिक काउंसलिंग से अर्ली डायग्नोसिस पॉसिबल है. हेल्दी वेट और शुगर कंट्रोल जैसे लाइफस्टाइल चॉइसेस कॉम्प्लीकेशंस को कम कर सकते हैं. वहीं, इसका ट्रीटमेंट सबटाइप के अकॉर्डिंग कस्टमाइज किया जाता है, जिसमें जेनेटिक टेस्टिंग और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट का इवैल्यूएशन गाइड करता है. ज्यादातर केसेस में ओरल मेडिसन ही पर्याप्त होती हैं. हालांकि, कुछ मामलों में इंसुलिन थेरेपी की जरूरत हो सकती है.

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ये 5 संकेत चीख-चीखकर बताते हैं शरीर में हो गई है Vitamin-B12 की कमी https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147500/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147500/

एक स्वस्थ शरीर में विटामिन्स, मिनरल्स, फैट, फाइबर और प्रोटीन सभी सही मात्रा में मौजूद होते हैं। इनमें से कुछ भी कम हो, तो शरीर का हाल बेहाल होने लगता है। हालांकि, Vitamin-B12 एक ऐसा विटामिन है, जिसकी कमी कई बार लोगों में देखने को मिल जाती है। यह विटामिन हमारे शरीर के कई फंक्शन्स के लिए जरूरी होता है। इसलिए इसकी कमी से शरीर में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं। लेकिन कैसे पता चले कि शरीर में विटामिन-बी12 की कमी हो रही है? आइए जानते हैं 5 ऐसे संकेत (Vitamin B-12 Deficiency Symptoms), जो इस ओर इशारा करते हैं।

थकान और कमजोरी महसूस होना
अगर आपको बिना किसी मेहनत के ही थकान और कमजोरी महसूस होती है, तो यह विटामिन-बी12 की कमी का पहला संकेत हो सकता है। यह विटामिन रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है, जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। बी12 की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसमें शरीर में ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता है और व्यक्ति हमेशा थका-थका महसूस करता है।

हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
विटामिन-बी12 नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से नसों को नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या चुभन जैसा अहसास होता है। इसे “पेरिफेरल न्यूरोपैथी” कहा जाता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह नर्वस सिस्टम को डैमेज करने लगती है।

याददाश्त कमजोर होना
विटामिन-बी12 की कमी का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है, फोकस में कमी आ सकती है और कभी-कभी कन्फ्यूजन भी हो सकता है। कुछ लोगों में इसकी कमी से डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन या मूड स्विंग्स भी देखे जाते हैं। लंबे समय तक बी12 की कमी बनी रहे, तो यह डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकती है।

त्वचा का पीला पड़ना
विटामिन-बी12 की कमी से शरीर में रेड ब्लड सेल्स ठीक से नहीं बना पाता, जिससे “मेगालोब्लास्टिक एनीमिया” हो सकता है। इस कंडिशन में त्वचा पीली दिखाई देने लगती है, जिसे पीलिया भी कहा जाता है। आंखों का सफेद हिस्सा भी हल्का पीला हो सकता है। यह संकेत बताता है कि शरीर में बी12 की गंभीर कमी हो चुकी है।

जीभ में सूजन या मुंह के छाले
विटामिन-बी12 की कमी से जीभ में सूजन, रेडनेस या चिकनापन आ सकता है, जिसे “ग्लॉसिटिस” कहते हैं। इसके अलावा, मुंह में बार-बार छाले होना भी इसकी कमी का संकेत हो सकता है।

विटामिन-बी12 की कमी को कैसे पूरा करें?
डाइट में शामिल करें- अंडे, दूध, दही, पनीर, मछली (सालमन, टूना), चिकन और रेड मीट में भरपूर मात्रा में बी12 पाया जाता है।

सप्लीमेंट्स- डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-बी12 के सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।

फोर्टिफाइड फूड्स- शाकाहारी लोग सोया मिल्क, बादाम मिल्क और अनाज जैसे फोर्टिफाइड फूड आइटम्स से भी बी12 हासिल कर सकते हैं।

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घूमने वालों की पहली पसंद क्‍यों बन रहा Naked Flying? https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147502/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147502/

दुन‍ियाभर के ज्‍यादातर लोगों को घूमने का शौक होता है। घूमने से मन को शांति म‍िलती है। घूमने से न केवल नई जगहों को देखने, उनकी संस्‍कृत‍ि जानने और मौज-मस्ती करने का मौका मिलता है, बल्कि ये आपकी लाइफ को कई तरह से बेहतर बना सकता है। ट्रैवल‍िंग करने से मेंटल और फ‍िज‍िकल हेल्‍थ दुरुस्‍त रहता है। हालांक‍ि कई लोग ऐसे भी हैं ज‍िन्‍हें लगता है क‍ि घूमने जाने के ल‍िए उन्‍हें कई पचड़ों में फंसना पड़ जाता है।

इनमें कपड़े पैक करने से लेकर खाने – पीने का समान रखने जैसी कई चीजें शाम‍िल हैं। उन्‍हें लगता है क‍ि इतना तामझाम करने की क्‍या ही जरूरत है। ट्रैवल‍िंग की दुन‍िया में नेकेड फ्लाइंग (Naked Flying) का चलन बढ़ गया है। नाम सुनकर आपके मन में जो ख्‍याल आया है, ये वैसा ब‍िल्‍कुल भी नहीं है। यहां इसका मतलब बिना कपड़ों के ट्रैवल करना नहीं है। अगर आपने भी अभी तक इस ट्रेंड के बारे में नहीं सुना है तो इस आर्टिकल को आख‍िरी तक जरूर पढ़‍िएगा।

आज हम आपको Naked Flying के बारे में सारी जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तारे से क‍ि नेकेड फ्लाइंग क्‍या है और ये इन द‍िनों क्‍यों इतना ट्रेंड कर रहा है। इसके फायदे क्‍या हैं –

क्‍या है Naked Flying?
नेकेड फ्लाइंग का मतलब है क‍ि आप ब‍िना क‍िसी झंझट में पड़कर भी ट्रैवल कर सकते हैं। ये ब‍िना सामान और हैवी लगेज के ट्रैवल करने की कला है। इसमें आप बस ऐसी चीजों को ले जा सकते हैं जाे पॉकेट में आसानी से फ‍िट हो जाएं। जैसे मोबाइल, चार्जर, वॉलेट। इससे आप पैंसे भी बचा सकते हैं। कई लोगों को आदत होती है क‍ि वे कहीं जाते हैं ताे भारी-भरकम लगेज तैयार करते हैं। इससे उन्‍हें एयरपोर्ट पर एक्‍सट्रा चार्ज भी देने पड़ते हैं। वहीं फ्लाइंग नेकेड के जर‍िए ट्रैवलर्स अपना समय भी बचा रहे हैं। ऐसा इसल‍िए क्‍योंकि जब आपके पास काेई सामान नहीं होगा तो Check-In में भी समय नहीं बर्बाद होगा। न ही सामान खोने का डर रहेगा।

यही लोग फॉलो कर रहे ट्रेंड
अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा क‍ि बिना ज्यादा कपड़ों, फुटव‍ियर और टॉयलेट्रीज के कैसे ट्रैवल किया जा सकता है? तो हम आपको बता दें क‍ि ये घूमने के इस ट्रेंड को वही लोग फॉलाे कर रहे हैं जो कम सामानों के साथ ट्रैवल कर सकते हैं। इसका मकसद स‍िर्फ आरामदायक और फ्री फ्लोइंग ट्रैवल को बढ़ाना है। अगर आप इस तरह की ट्रैवल‍िंग करना चाहते हैं तो आपको कुछ खास चीजों का ध्यान रखना होगा।

ऐसे करें स्‍मार्ट पैक‍िंग
आप ऐसे कपड़े पैक करें जो बैगपैक में आ सकें। स्मार्ट टॉयलेट्रीज रख लें। टेक्नोलॉजी का कम से कम इस्तेमाल करें। जैसे सिर्फ मोबाइल, पावर बैंक और हेडफोन ही पैक करें। लैपटॉप या कैमरा ले जाने से बचना चाह‍िए। डिजिटल बोर्डिंग पास और ई-डॉक्यूमेंट्स फोन में रखें। इससे आपको हार्ड कॉपी रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पासपोर्ट, वीजा और फ्लाइट टिकट की स्कैन कॉपी मोबाइल में सेव करें।

क्‍या हैं इसके फायदे
एयरपोर्ट पर चेक इन करने में आसानी होती है।

इसमें आपको हैवी लगेज के ल‍िए एक्‍सट्रा पे करने की भी जरूरत नहीं होती है।

फ्लाइट मिस होने की टेंशन भी कम हो जाती है।

होटल या घूमने फ‍िरने के दौरान सामान चोरी होने का डर भी नहीं रहता है।

आप कम्फर्ट और फ्रीडम के साथ ट्रैवल‍िंग कर सकते हैं।

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रिमझिम बारिश में एक्सप्लोर करें महाराष्ट्र का संगमेश्वर, वीकेंड में बनाएं घूमने का प्लान https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147504/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147504/

महाराष्ट्र में जब भी बारिश होती है, तो लोनावला से लेकर माथेरान और महाबलेश्वर जैसी जगहों पर पर्यटकों की भीड़ लगने लगती है। वहीं महाराष्ट्र की फेमस जगहों से दूसर संगमेश्वर एक ऐसी जगह है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है।

महाराष्ट्र हमारे देश का एक खूबसूरत और प्रमुख राज्य है। महाराष्ट्र एक ओर से अरब सागर और दूसरी ओर से सतपुड़ा पर्वतमाला से घिरा हुआ है। यह एक ऐसा राज्य है, जो रिमझिम बारिश में पर्यटन हब का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। महाराष्ट्र में जब भी बारिश होती है, तो लोनावला से लेकर माथेरान और महाबलेश्वर जैसी जगहों पर पर्यटकों की भीड़ लगने लगती है। वहीं महाराष्ट्र की फेमस जगहों से दूसर संगमेश्वर एक ऐसी जगह है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। वहीं हल्की रिमझिम बारिश में संगमेश्वर की खूबसूरती किसी हसीन खजाने से कम नहीं लगती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको संगमेश्वर की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं।

महाराष्ट्र में संगमेश्वर
संगमेश्वर की खासियत और खूबसूरती बेहद कमाल की है। यह रत्नागिरी में स्थित एक खूबसूरत और मनमोहक जगह है। संगमेश्वर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से करीब 284 किमी, पुणे से 247 किमी और कोल्हापुर से करीब 120 किमी दूर है।

क्यों फेमस है संगमेश्वर
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित संगमेश्वर भले ही एक छोटा सा शहर है, लेकिन यह जगह अपने धार्मिक, ऐतिहासिक महत्व और खूबसूरत पर्यटन स्थलों के लिए पूरे राज्य में फेमस है। खासकर यह जगह संगमेश्वर मंदिर और संगमेश्वर शहर के लिए फेमस है। जोकि भगवान शिव को समर्पित है।

संगमेश्वर महाराष्ट्र का एक ऐसा शहर है, जो शास्त्री नदी और सोनावी नदी के संगम पर स्थित है। इसके चलते यहां पर रिमझिम बारिश में राज्य के हर कोने से लोग घूमने के लिए आते हैं। इस स्थान को रत्नागिरी का छिपा हुआ खजाना भी माना जाता है। वहीं गमेश्वर वहीं स्थान है, जहां पर औरगंजेब ने छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपति संभाजी महाराज को बंदी बनाया था।

पर्यटकों के लिए क्यों खास है ये जगह
संगमेश्वर का इतिहास प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है। रिमझिम बारिश में स्थित वॉटरफॉल से लेकर घास के मैदान और नदियों की खूबसूरती इस जगह को बेहद खूबसूरत बनाने का काम करती है। संगमेश्वर की हरियाली देखते ही बनती है।

संगमेश्वर अपने शांत और शुद्ध वातावरण के लिए जाना जाता है। शहर की भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर संगमेश्वर में आप सुकून के कई पल बिताने के लिए पहुंचते हैं। संगमेश्वर अपनी खूबसूरती के साथ ही एडवेंचर एक्टिविटी के लिए भी जाना जाता है। कई लोग मानसून में यहां पर सिर्फ ट्रेकिंग का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते हैं।

संगमेश्वर मंदिर
संगमेश्वर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में संगमेश्वर मंदिर काफी फेमस है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण पर्यटक यहां घूमने के लिए पहुंचते रहते हैं। मंदिर के आसपास से बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। कर्णेश्वर मंदिर को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं और यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है।

मार्लेश्वर वॉटरफॉल
संगमेश्वर के पहाड़ों में स्थित मार्लेश्वर एक फेमस और खूबसूरत वॉटरफॉल है। मानसून में यहां सिर्फ स्थानीय पर्यटक नहीं बल्कि अन्य कई शहरों से पर्यटक घूमने के लिए पहुंचते हैं। यह वॉटरफॉल प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां के आसपास की हरियाली पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है। इसके साथ ही आप छत्रपति संभाजी महाराज की समाधि को एक्सप्लोर करना न भूलें।

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जून के लॉन्ग वीकेंड में गर्मी से बचने के लिए पहुंचे इन ठंडी जगहों पर https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147506/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147506/

जून के फर्स्ट वीक में 3 दिनों की लंबी छुट्टियां मिलने वाली हैं। हालांकि अगर आप ऑफिस से सिर्फ 1 दिन की छुट्टी लेते हैं, तो आप 4 दिन घूमने का लुत्फ उठा सकते हैं। आप इस लॉन्ग वीकेंड में हिमाचल से लेकर उत्तराखंड और दक्षिण भारत से लेकर पूर्व भारत तक कई बेहतरीन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

लॉन्ग वीकेंड में घूमने का मजा हर किसी को होता है। ऐसे में घूमने जाने के लिए लोग लॉन्ग वीकेंड का इंतजार करते हैं। जिससे कि वह अपनी फैमिली, पार्टनर या दोस्तों के साथ छुट्टी मनाने जा सकें। वहीं जून के पहले सप्ताह में लॉन्ग वीकेंड का इंतजार खत्म होने वाला है। क्योंकि जून के फर्स्ट वीक में 3 दिनों की लंबी छुट्टियां मिलने वाली हैं। हालांकि अगर आप ऑफिस से सिर्फ 1 दिन की छुट्टी लेते हैं, तो 3 नहीं बल्कि 4 दिन घूमने का लुत्फ उठा सकते हैं। आप इस लॉन्ग वीकेंड में हिमाचल से लेकर उत्तराखंड और दक्षिण भारत से लेकर पूर्व भारत तक भारत की कई बेहतरीन और शानदार जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

ऐसे में अगर आप जून महीने में सिर्फ 5 तारीख को छुट्टी लेते हैं, तो 5 से 8 यानी की 4 दिनों तक जून महीने के फर्स्ट वीक में घूमने का लुत्फ उठा सकते हैं। अगर आप 05 जून की छुट्टी नहीं भी लेते हैं, तो भी आप 3 दिन घूम सकते हैं।

जून लॉन्ग वीकेंड में घूमने की जगहें
जून साल का एक ऐसा महीना होता है, जब आप देश के कई राज्यों में गर्मी का तापमान आसमान छूने लगता है। जून में जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तो कई लोग ठंडी-ठंडी जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं।

नारकंडा
जून की छुट्टियों में आप शिमला से करीब 61 किमी दूर स्थित नारकंडा घूमने के लिए जा सकते हैं। हालांकि लोग हिमाचल में मनाली, शिमला और धर्मशाला जाते हैं। लेकिन इस बार आप नारकंडा जरूर एक्सप्लोर करें।

नारकंडा हिमाचल प्रदेश का एक फेमस और खूबसूरत हिल स्टेशन है। यहां की हसीन वादियों में आप अपने परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ खूबसूरत पल बिता सकते हैं।

धारचूला
उत्तराखंड के नैनीताल, ऋषिकेश या मसूरी में घूमकर बोर हो गए हैं, तो फिर जून की छुट्टियों में धारचूला की हसीन वादियों को एक्सप्लोर करने पहुंच जाना चाहिए। धारचूला उत्तराखंड का एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है। जून के महीने में अक्सर ठंड-ठंडी हवाएं चलती रहती हैं। इसके अलावा भी आप यहां पर एडवेंचर एक्टिविटी कर सकते हैं।

मुख्य आकर्षण
चिरकिला डैम

अस्कोट अभयारण्य

नारायण आश्रम

गंगटोक
वहीं अगर आप जून के महीने में छुट्टियां मनाने के लिए नॉर्थ ईस्ट इंडिया घूमने का प्लान बना रहे हैं। फिर तो आपको गंगटोक पहुंच जाना चाहिए। समुद्र तल से करीब 5 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद गंगटोक नॉर्थ ईस्ट के टॉप डेस्टिनेशन में से एक माना जाता है। जून के महीने में यहां पर सिर्फ देशी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी घूमने के लिए पहुंच सकते हैं। जून के महीने में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है।

मुख्य आकर्षण
ताशी व्यू पॉइंट

त्सोमो झील

हनुमान टोक

इन जगहों को भी करें एक्सप्लोर
देश में अन्य और कई शानदार और खूबसूरत जगहें मौजूद हैं। जहां पर आप जून के महीने में छुट्टियां मनाने के लिए पहुंच सकते हैं। जैसे- कोणार्क, दक्षिण भारत में वायनाड और कुर्ग। इसके साथ हिमाचल प्रदेश में आप सांगला, रोहड़ू और उत्तराखंड में मुनस्यारी या चकराता पहुंच सकते हैं।

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Jharkhand Tourism: प्रकृति, इंजीनियरिंग और पर्यटन का अद्भुत संगम है झारखंड का मैथन डैम https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147508/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147508/

मैथन डैम की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, जब मौसम सुखद और ठंडा होता है। मानसून के दौरान (जुलाई से सितंबर) झील और आसपास का क्षेत्र हरे-भरे हो जाते हैं, लेकिन भारी वर्षा के कारण फिसलन और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ हो सकती हैं।

मैथन डैम, झारखंड के धनबाद जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, इंजीनियरिंग कौशल और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह डैम बराकर नदी पर स्थित है और झारखंड तथा पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित है।

ऐतिहासिक और तकनीकी विशेषताएँ
निर्माण और उद्देश्य: मैथन डैम का निर्माण 1953 से 1957 के बीच हुआ था और इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और विद्युत उत्पादन था। यह डैम भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्वप्नों में से एक था।

आकार और क्षमता: डैम की लंबाई लगभग 4,789 मीटर और ऊँचाई 50 मीटर है। इसका जलाशय 65 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो मैथन झील के नाम से जाना जाता है।

विद्युत उत्पादन: मैथन डैम में एशिया का पहला भूमिगत जलविद्युत संयंत्र स्थित है, जो 60 मेगावाट की क्षमता से बिजली उत्पन्न करता है।

पर्यटन आकर्षण
मैथन झील: झील की शांत जलराशि और हरे-भरे परिवेश इसे नौका विहार, मछली पकड़ने और पक्षी अवलोकन के लिए आदर्श बनाते हैं।

डियर पार्क: डैम के पास स्थित डियर पार्क में पर्यटक हिरणों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकते हैं।

कल्याणेश्वरी मंदिर: डैम से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर माँ काली को समर्पित है और धार्मिक आस्था का केंद्र है।

पिकनिक और फोटोग्राफी: मैथन डैम का सुंदर परिदृश्य इसे पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त स्थान बनाता है, विशेषकर सूर्यास्त के समय।

कैसे पहुँचें
सड़क मार्ग: मैथन डैम, धनबाद से लगभग 48 किलोमीटर और आसनसोल से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन बराकर है, जो डैम से लगभग 8 किलोमीटर दूर है।

वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा रांची में स्थित है, जो डैम से लगभग 194 किलोमीटर दूर है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय
मैथन डैम की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, जब मौसम सुखद और ठंडा होता है। मानसून के दौरान (जुलाई से सितंबर) झील और आसपास का क्षेत्र हरे-भरे हो जाते हैं, लेकिन भारी वर्षा के कारण फिसलन और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ हो सकती हैं।

यात्रा सुझाव
डैम क्षेत्र में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक हो सकती है; यात्रा से पहले स्थानीय अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करें।

डैम के किनारे फिसलन हो सकती है; उचित जूते पहनें और बच्चों पर विशेष ध्यान दें।

स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण का सम्मान करें; कचरा न फैलाएँ और वन्यजीवों को परेशान न करें।

मैथन डैम न केवल झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, बल्कि यह भारत के इंजीनियरिंग कौशल और प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रतीक है। यदि आप प्रकृति, इतिहास और रोमांच का संगम अनुभव करना चाहते हैं, तो मैथन डैम की यात्रा अवश्य करें।

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रात में नजर आने वाले 5 लक्षण चीख-चीखकर बताते हैं खराब हो गई है क‍िडनी https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147496/ Mon, 09 Jun 2025 14:45:37 +0000 https://wenews.co.in/NewsArticle/147496/

किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो खून को साफ करता है और विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। हालांक‍ि आज कल लोग अनहेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो कर रहे हैं। इस कारण किडनी पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इससे किडनी खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

क‍िडनी हमारे शरीर का अहम ह‍िस्‍सा है। ये ब्‍लड को फ‍िल्‍टर करने का काम करता है। साथ ही हमारे शरीर से जहारीले पदार्थों को बाहर न‍िकालता है। इसका हेल्‍दी रहना बेहद जरूरी है। अगर क‍िडनी सही तरीके से काम नहीं करेगी तो हमारे शरीर में कई दिक्‍कतें बढ़ सकती हैं। आज कल लोगों की अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और खराब खानपान के कारण क‍िडनी पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

ऐसे में क‍िडनी के डैमेज होने का खतरा भी बढ़ गया है। आपको बता दें क‍ि क‍िडनी डैमेज होने पर कुछ लक्षण हमारे शरीर में नजर आने लगते ह‍ैं। इन्‍हें पहचानना सबसे ज्‍यादा जरूरी है। वहीं कुछ लक्षण ऐसे भी हैं जो स‍िर्फ रात के समय या सोते समय ही नजर आते हैं। अगर इन्‍हें पहचान कर समय रहते इलाज करा ल‍िया जाए तो जान बच सकती है। इससे आप अपनी किडनी को दोबारा हेल्दी बना सकते हैं।

आज का हमारा लेख भी इसी व‍िषय पर है। हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो रात के समय ही नजर आते हैं। आइए उन लक्षणों के बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से –

पैरों में सूजन
अगर रात में सोने से पहले आपको अपने पैरों पर सूजन नजर आए ताे समझ लें क‍ि आपकी क‍िडनी सही तरीके से काम नहीं कर पा रही है। कई बार सोकर उठने पर भी पैरों में सूजन बनी रहती है। इसका सीधा मतलब ये है क‍ि आपके शरीर में पानी और सोडियम जमा हो रहा है।

बार-बार पेशाब आना
अगर आप रात में सोते कम और बार-बार वॉशरूम की ओर भागते हैं ताे ये भी क‍िडनी डैमेज होने के लक्षणों में से एक है। जब आपकी क‍िडनी खराब होने लगती है तब आपको बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है। ऐसे कंडीशन में ब‍िना देर क‍िए डॉक्‍टर के पास जाना सही रहेगा।

प्‍यास लगना
कई मामलों में क‍िडनी खराब हाेने पर शरीर में पानी की कमी भी हाेने लगती है। ऐसे में आपको रात के समय बार-बार प्‍यास लगती है। अगर आप रात में हद से ज्‍यादा पानी पीते हैं तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय सतर्क हो जाना चाह‍िए। ये किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।

सांस फूलना
अगर रात के समय अचानक से सांस फूलने लगे तो समझ जाएं क‍ि आपकी क‍िडनी खराब हाे चुकी है। जब किडनी सही तरीके से काम नहीं कर पाती है तो सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

खुजली और रैशेज
जब क‍िडनी सही तरीके से काम करने में सक्षम नहीं होती है तो इससे हमारे शरीर में टॉक्सिन्‍स जमा होने लगते हैं। इस कारण त्वचा पर खुजली और जलन की समस्या हो सकती है। अगर आपको छोटे-छोटे दाने भी न‍िकल रहे हैं तो ये भी क‍िडनी डैमेज होने का संकेत हो सकता है।

किडनी को कैसे रखें हेल्‍दी
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।
डायबिटीज को कंट्रोल करें।
वजन मेंटेन रखें।
रोजाना एक्सरसाइज करें।
शरीर में पानी की कमी न हाेने दें।
नमक कम खाएं।
स्मोक से परहेज करें।

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