पर्यटन – The Lucknow Times https://thelucknowtimes.com Hindi News, Lifestyle & Entertainment Articles Fri, 01 Aug 2025 09:31:47 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 गुलामी के युग में भी भक्ति—शक्ति से तुलसीदास ने जाग्रत रखी जनचेतनाः योगी https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149377/ Fri, 01 Aug 2025 09:31:47 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149377 चित्रकूट में आयोजित तुलसी जयंती समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री

तुलसीदास जी की रामचरितमानस को बताया भारत की चेतना का आधार, सीएम ने चित्रकूट की विरासत को विकास से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयासों का किया ज़िक्र, कहा- जो विवादों में जीते हैं, वे पूज्य संतों को भी विवादों में घसीटना चाहते हैं, सनातन धर्म और भारत की समृद्ध विरासत की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा

चित्रकूट : धार्मिक नगरी चित्रकूट में संत तुलसीदास के जयंती समारोह (तुलसी जयंती) में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 500 वर्ष पूर्व जब इस गांव की स्थिति शायद साधनों के अभाव और कठिनाइयों से ग्रस्त रही होगी, ऐसे समय में एक दिव्य आत्मा ने जन्म लिया और बाल्यावस्था में ही प्रभु श्रीराम के चरणों में स्वयं को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि उस कालखंड में जब अकबर का साम्राज्य विस्तार पर था और दरबार में जगह पाने की होड़ थी, तब तुलसीदास जी ने रामबोला के रूप में खुद को किसी दरबारी की सेवा में नहीं बल्कि केवल प्रभु श्रीराम की भक्ति में समर्पित किया।

सीएम योगी ने कहा कि जब देश के राजे-रजवाड़े विदेशी आक्रांता की अधीनता स्वीकार कर रहे थे, उस समय तुलसीदास जैसे संत भक्ति और शक्ति के अद्भुत संगम के रूप में जनचेतना को जाग्रत कर रहे थे। उन्होंने प्रतिकार का मार्ग तलवार नहीं, रामलीला और रामचरितमानस के माध्यम से चुना। मुख्यमंत्री ने उस समय की राजनीतिक चालबाजियों की ओर भी संकेत किया। उन्होंने कहा कि अकबर ने अपने शासन का एक सॉफ्ट चेहरा प्रस्तुत किया, पर उसके पीछे की क्रूरता आज भी हमें दिखती है। संतों की परंपरा उस समय भी दृढ़तापूर्वक उसका प्रतिकार कर रही थी। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर जगतगुरु रामभद्राचार्य जी और पूज्य मुरारी बापू के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। कार्यक्रम में रामकथा के प्रचारकों को तुलसी अवार्ड व रत्नावली अवार्ड से सम्मानित किया गया।

श्रद्धालुओं की आस्था और प्रेरणा का केंद्र है चित्रकूट
चित्रकूट की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही धरती है जहां ऋषि-मुनियों ने तप किया, जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का सबसे लंबा समय बिताया। यह वही धरती है जिसने रामायण और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों की रचना की आधारभूमि प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूज्य संतों के दर्शन के लिए हम यहां आ सके, यह हमारा सौभाग्य है। संत तुलसीदास जी की स्मृति को जीवित रखने के लिए पूज्य मुरारी बापू द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में चित्रकूट को विरासत के साथ विकास से जोड़ने का कार्य प्रारंभ हो चुका है। यह स्थान केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और प्रेरणा का केंद्र है।

राम नाम के स्मरण से धन्य होगा जीवन
मुख्यमंत्री ने रामजन्मभूमि आंदोलन के संदर्भ में जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के योगदान की भी चर्चा की और कहा कि जब प्रमाण मांगे गए तो उनके सामने महाराज जी ने धाराप्रवाह बोलना शुरू किया, तो वे भौचक्के रह गए। यही भगवान की सिद्धि है। उन्होंने पूज्य मुरारी बापू द्वारा आगामी रामकथा आयोजनों को प्रयागराज, अयोध्या और काशी में किए जाने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि राम नाम का स्मरण कर हर कोई अपने जन्म को धन्य करेगा।

मॉरीसस में रामचरित मानस बनी संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम
मुख्यमंत्री ने अपनी मॉरीशस यात्रा का भी उल्लेख करते हुए बताया कि गुलामी के काल में जब पूर्वजों को वहां मजदूरी के लिए ले जाया गया, तब उनका एकमात्र सहारा तुलसीदास जी की रामचरितमानस थी। वे पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन मानस के माध्यम से उन्होंने अपनी संस्कृति को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि आज वहीं के मजदूरों के वंशज राष्ट्राध्यक्ष बने हैं और घरों में पूजा के केंद्र में अब भी रामचरितमानस ही है।

जिनका जीवन विवादित, वही संतों को विवादों में घसीट रहे
मुख्यमंत्री ने पूज्य संतों को विवादों से जोड़ने वाले लोगों पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर पूज्य संतों को विवादित करने की कोशिश करते हैं। जिनका जीवन विवादित है, वही ऐसा करते हैं। वे लगातार विघ्न और बाधा खड़ी करने की कोशिश करेंगे, लेकिन हमें इसकी चिंता न करते हुए सनातन धर्म और भारत की समृद्ध विरासत की रक्षा के लिए एकजुट होकर प्रयास करना होगा।

रामकथा के प्रचारकों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने तुलसी अवार्ड और रत्नावली अवार्ड से सम्मानित सभी रामकथा मर्मज्ञों को बधाई दी और इसे सनातन धर्म के प्रति उनके योगदान का सम्मान बताया। इस अवसर पर जगतगुरु रामभद्राचार्य जी, कथाव्यास मुरारी बापू, जगतगुरु विष्णुस्वामी संप्रदायाचार्य स्वामी संतोषाचार्य जी महाराज (सतुआ बाबा), प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, जनपद के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल मन्नू कोरी समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी में निरंतर बढ़ रहे बाघ https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149188/ Mon, 28 Jul 2025 21:46:09 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149188 अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस आज मनाया जाएगा

2018 की गणना में यूपी में थे 173 बाघ, 2022 में बढ़कर संख्या हुई 222, बाघों के संरक्षण के लिए योगी सरकार कर रही अनेक प्रयास, सीएम योगी के मार्गदर्शन में 2019 में शुरू किया गया था ‘बाघ मित्र’ कार्यक्रम, मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने में बड़ी भूमिका निभा रहे ‘बाघ मित्र’, प्रधानमंत्री भी यूपी के प्रयास की कर चुके हैं सराहना

लखनऊ : योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पशु बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि जारी है। 2018 में हुई गणना में यूपी में जहां 173 बाघ थे, वहीं 2022 में बढ़कर यह संख्या 222 हो गई है। योगी सरकार बाघों के संरक्षण, संवर्धन के लिए अनेक प्रयास कर रही है। यही नहीं, बाघों के लिए गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रबंधन भी किया जा रहा है। वहीं मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने में ‘बाघ मित्र’ भी बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूपी के इस प्रयास की सराहना कर चुके हैं। पीलीभीत, दूधवा, अमानगढ़ व रानीपुर टाइगर रिजर्व में भी बाघ संरक्षण को लेकर अनेक कार्य किए जा रहे हैं।

यूपी में बढ़ी बाघों की संख्या, 2022 की गणना के मुताबिक हुए 222 बाघ
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। 2022 में हुई गणना के मुताबिक यूपी में कुल 222 बाघ हैं। उन्होंने बताया कि 2006 में बाघों की गणना में यूपी में 109, 2010 में 118, 2014 में 117, 2018 में 173 व 2022 में 222 पाए गए थे। दूधवा टाइगर रिजर्व में 2014 में 68, 2018 में 82 तथा 2022 की गणना में 135 टाइगर पाए गए। वहीं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 63, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में 20, रानीपुर टाइगर रिजर्व में 4 बाघ हैं।

दूधवा टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण व सुरक्षा की दृष्टि से किए जा रहे कार्य
एम-स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग के अतर्गत जनपद लखीमपुर खीरी के अंतर्गत दूधवा टाइगर रिजर्व, बफर जोन व दूधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग में औसतन कुल 152337 किमी. प्रतिमाह तथा बहराइच के अंतर्गत कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में कुल 41684 किमी. प्रतिमाह सघन गश्त की जाती है। एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग ऐप के माध्यम से दो पहिया, चार पहिया, पैदल, हाथी, साइकिल व नाव के माध्यम से यह गश्त होती है। वहीं हैबीटेट इंप्रूवमेंट, वाटर होल मैनेजमेंट व मानव वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए भी निरंतर अनेक प्रयास हो रहे हैं।

2019 में शुरू हुआ था ‘बाघ मित्र’, 2023 में सीएम योगी ने की ऐप की लांचिंग
रुहेलखंड के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने बताया कि पहले आए दिन मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं होती थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 2019 में पीलीभीत में ‘बाघ मित्र’ कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य अप्रिय घटनाओं पर अंकुश लगाना था। यह कार्यक्रम काफी प्रभावी रहा। इसके बाद अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में ‘बाघ मित्र’ ऐप की लॉचिंग भी की।

पीलीभीत में अब तक जुड़े 120 ‘बाघ मित्र’
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि पीलीभीत में बाघ मित्रों का व्हाट्सग्रुप बनाया गया है। इसमें आसपास के गांवों के रहने वाले 120 लोग ‘बाघ मित्र’ के रूप में जुड़े हैं। इसमें चार महिलाएं समेत अन्य युवा, बुजुर्ग भी शामिल हैं। बाघ मित्र के लिए आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। श्री सिंह ने बताया कि जंगल के समीप के पांच किमी. दूर के गांवों के ग्रामीणों को ‘बाघ मित्र’ बनाकर उन्हें वन विभाग की तरफ से प्रशिक्षण दिया गया। जंगल से बाहर बाघ या अन्य जानवर दिखने पर ‘बाघ मित्र’ तुरंत ग्रुप में लिखकर और फोन कर विभाग को भी जानकारी देते हैं। इससे विभाग के अधिकारी व कर्मचारी तत्काल अलर्ट हो जाते हैं और टीम को रवाना कर देते हैं। इसके जरिए समय रहते टीम एक्शन में आ जाती है। बाघ मित्र ऐप में जानवर की फोटो खींचकर ग्रामीण अपडेट कर सकते हैं। कई बार वे जानवर की सही पहचान नहीं कर पाते थे। इससे दिक्कत होती थी। फोटो अपडेट होने पर विभागीय लोग जानवर को पहचान लेते हैं। इससे लोकेशन भी मिल जाती है कि जंगल से बाघ की दूरी कितनी है। यदि बाघ खेत के पास है तो पहले मॉनीटरिंग टीम भेजते हैं। बाघ मित्र कार्यक्रम निरंतर चलाकर लोगों को सजग, सुरक्षित रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर आज होंगे विविध आयोजन
योगी सरकार के निर्देश पर अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर अनेक आयोजन भी किए जाएंगे। लखनऊ चिड़ियाघर में वॉकाथान का आयोजन होगा। इसमें वन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्यमंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव (वन-पर्यावरण) अनिल कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष सुनील कुमार चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी आदि मौजूद रहेंगी। इसके साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भी अनेक जागरूकता कार्यक्रम होंगे। साथ ही मानव वन्य जीव संघर्ष को रोकने में योगदान देने वालों का सम्मान भी किया जाएगा।

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UPITS 2025 : दुनिया के सामने होगा यूपी के पर्यटन स्थलों का महा प्रदर्शन https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/149097/ Sat, 26 Jul 2025 22:00:17 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=149097 सीएम योगी के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने शुरू की भव्य तैयारियां

पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने वाला मंच बनेगा यूपीआईटीएस-2025, यूपी में पर्यटन की विविधता और सांस्कृतिक धरोहरों का होगा जोरदार प्रदर्शन, देश-दुनिया के आगंतुकों को आधुनिक और आकर्षक स्टॉल के जरिए होगी लुभाने की कोशिश, यूपी के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में साबित होगा बड़ा कदम

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने आगामी यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2025) की तैयारियां बड़े स्तर पर शुरू कर दी हैं। यह ट्रेड शो 25 से 29 सितंबर 2025 तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्स्पो मार्ट में आयोजित होगा। विभाग का मुख्य लक्ष्य लाखों देसी और विदेशी आगंतुकों के सामने उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम संभावनाओं को दिखाना है, साथ ही यहां के स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और विविध संस्कृतियों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना है।

पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने वाला मंच बनेगा यूपीआईटीएस-2025
यूपीआईटीएस-2025 उत्तर प्रदेश सरकार का प्रमुख ट्रेड शो है, जो नीति निर्माताओं, कॉर्पोरेट नेताओं, व्यापारिक प्रतिनिधियों और वैश्विक विशेषज्ञों को एक साथ लाने का कार्य करता है। इस बार भी यह आयोजन राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इंडिया एक्स्पो मार्ट के हॉल नंबर 7 में पर्यटन विभाग लगभग 465 वर्ग मीटर के बड़े स्टॉल के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों और उत्पादों को आकर्षक तरीके से पेश करने की तैयारी कर रहा है।

यूपी में पर्यटन की विविधता और सांस्कृतिक धरोहरों का होगा जोरदार प्रदर्शन
पर्यटन विभाग के स्टॉल में उत्तर प्रदेश के हेरिटेज स्थलों, पीपीपी मॉडल पर आधारित परियोजनाओं, पर्यटन यात्राओं, पर्यटन सर्किट्स, हस्तशिल्प, ओडीओपी उत्पादों और मंदिर वास्तुकला जैसे थीम्स पर आधारित क्रिएटिव सेटअप तैयार किया जाएगा। साथ ही आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के पर्यटन से जुड़े ऐप्स की भी जानकारी दी जाएगी। जिससे उन्हें इंस्टॉल करने में सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा वेबसाइट्स और क्यूआर कोड के जरिए जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे राज्य की पर्यटन क्षमताओं को मजबूत ब्रांड इमेज तैयार करने में खासी मदद मिलेगी।

आगंतुकों को लुभाएंगे आधुनिक और आकर्षक स्टॉल डिजाइन
विभाग की योजना है कि उसके स्टॉल को तीन तरफ से खुला डिजाइन किया जाए, जिसमें मुख्य फसाड, सीएनसी कटिंग वाली लाइटेड साइनेज, एलईडी वॉल, लाइटिंग, कार्पेट और डिस्प्ले यूनिट्स शामिल होंगी। इसके अलावा वीवीआईपी लाउंज, बैठक टेबल, कॉफी मशीनें, पैंट्री और रिसेप्शन काउंटर जैसी सुविधाएं भी होंगी। इसके अलावा, ऑटो-नेविगेशन स्क्रीन पर यूपी के प्रमुख पर्यटन स्थलों को दिखाया जाएगा और एआर आधारित डिजिटल टच पैनल पर कम से कम 6 पर्यटन स्थलों की तस्वीरों के साथ सेल्फी लेने की व्यवस्था होगी।

होंगे सांस्कृतिक नृत्य आयोजन, ले सकेंगे सेल्फी
यूपी टूरिज्म विभाग की योजना है कि स्टॉल में 10 से 15 वर्ग मीटर का विशेष स्पेस सांस्कृतिक प्रदर्शनों के लिए तैयार किया जाए, इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। यहां मयूर नृत्य (ब्रज क्षेत्र), ट्राइबल डांस (सोनभद्र और लखीमपुर), बुंदेली लोक नृत्य (झांसी) और कथक (लखनऊ घराना) जैसे नृत्यों का प्रदर्शन होगा। रोजाना 6 शॉर्ट परफॉर्मेंस (प्रत्येक 5 मिनट) होंगे और आगंतुक इन कलाकारों के साथ सेल्फी ले सकेंगे। जैसे, ‘पीकॉक कृष्णा’ बूथ में मोर मुकुट पहनकर पोज देना या ‘जंगल वॉरियर’ जोन में ट्राइबल प्रॉप्स के साथ फोटो खिंचवाना।

आयोजित होंगे बी2बी सेशंस, मौजूद रहेंगे टूरिज्म मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव्स
विभाग की योजना है कि इवेंट प्लानिंग, बी2बी मीटिंग्स और 20 सह-प्रदर्शकों के लिए रजिस्ट्रेशन टेबल्स की व्यवस्था की जाए। यहां प्रत्येक पर दो टूरिज्म मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव्स मौजूद रहेंगे। यहां पर एलईडी स्टैंडी, लिट स्टैंडी, ब्रोशर स्टैंड्स और ग्लास शोकेस के जरिए पर्यटन सामग्रियां प्रदर्शित होगी। इससे आगंतुकों को यूपी के पर्यटन के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी और व्यापारिक साझेदारियां मजबूत होंगी।

यूपी के पर्यटक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में होगा बड़ा कदम
कुल मिलाकर, पर्यटन विभाग यूपीआईटीएस 2025 के जरिए प्रदेश के पर्यटक स्थलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में जुटा है। यह आयोजन न केवल राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने लाएगा, बल्कि पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। लाखों आगंतुकों के लिए यह एक यादगार अनुभव हो, विभाग इसके लिए मिशन मोड में जुटा हुआ है।

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यूपी के 11 विरासत भवनों और किलों को भव्य पर्यटन स्थलों में बदलेगी योगी सरकार https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/148394/ Mon, 14 Jul 2025 08:50:37 +0000 https://thelucknowtimes.com/?p=148394 लखनऊ, गोंडा, कानपुर सहित बुंदेलखंड में मौजूद हैं ये किले, पर्यटन विकास से बढ़ेगा रोजगार

महोबा का मस्तानी महल, मथुरा का सीताराम महल, गोण्डा की वजीरगंज बारादरी का भी होगा कायाकल्प, सभी स्थल अपनी खास वास्तुकला और इतिहास की कहानियों के लिए हैं मशहूर, पीपीपी मोड में डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर आधार पर होगा पुनरोद्धार का काम

लखनऊ : योगी सरकार ने खंडहर में तब्दील हो रहे राज्य के ऐतिहासिक धरोहरों को नया जीवन देने के लिए प्रयास शुरू कर दिये हैं। पर्यटन विभाग प्रदेश के 11 पुराने किलों और भवनों को चमकाने की तैयारी में है। विभाग ने एजेंसियों के माध्यम से इसके लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) आमंत्रित किया है। ये काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत होगा, जहां एजेंसी इन जगहों को डिजाइन करेगी, बनाएगी, पैसे लगाएगी, चलाएगी और बाद में सरकार को सौंप देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू होने जा रही इस पहल से न सिर्फ इन विरासत किलों और भवनों का इतिहास बचेगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन बढ़ेगा और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा।

इन 11 विरासत स्थलों का होगा पुनरोद्धार
इन 11 विरासत स्थलों में ललितपुर का तालभेहट किला, बांदा का रनगढ़ और भुरागढ़ किला, गोण्डा की वजीरगंज बारादरी, लखनऊ का आलमबाग भवन, गुलिस्तान-ए-एरम और दर्शन विलास, कानपुर की टिकैत राय बारादरी, महोबा का मस्तानी महल और सेनापति महल, झांसी का तहरौली किला और मथुरा का सीताराम महल (कोटवान किला) शामिल हैं। ये सभी जगहें अपनी खास वास्तुकला और इतिहास की कहानियों के लिए मशहूर हैं। इनका पुनरोद्धार करके इन्हें होटल, सांस्कृतिक केंद्र या संग्रहालय में बदला जाएगा, ताकि पर्यटक यहां ठहर सकें और इतिहास को करीब से महसूस कर सकें। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में ये योजना खास तौर पर फायदेमंद होगी, जहां पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

यूपी बन रहा देश-दुनिया का चहेता टूरिस्ट डेस्टिनेशन
योगी सरकार का ये कदम इसलिए भी खास है, क्योंकि इससे यूपी की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के साथ-साथ आधुनिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन विभाग के मुताबिक, ये परियोजना न सिर्फ इन पुरानी इमारतों को नया रूप देगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी। मुख्यमंत्री ने पहले ही इको-टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। उनकी ये कोशिशें यूपी को देश और दुनिया में पर्यटन का एक चहेता डेस्टिनेशन बना रही हैं। अयोध्या, काशी, और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ राज्य के अन्य प्राचीन मंदिरों और तीर्थ स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। 2024 में 65 करोड़ पर्यटकों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थलों का दौरा किया, जो इन पहलों की सफलता को दर्शाता है।

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भक्‍ति‍ से जुड़ा हर कोना देखा होगा, पर क्या Mathura-Vrindavan की खोज किसने की https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147378/ Sat, 07 Jun 2025 16:45:12 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147378/

पूरे भारत में ऐसी कई जगहें हैं जाे आध्यात्म का केंद्र हैं। उन्हीं में से आध्यात्मिक और पवित्र जगहाें में से एक मथुरा शहर है। ये भारत के सात पवित्र शहरों में से एक है। मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में स्थित इस शहर में हर साल करोड़ाें भक्त भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के दर्शन करने आते हैं। वैसे तो यूपी में कई फेमस और ऐतिहासिक मंदिर हैं, लेकिन मथुरा और वृंदावन की बात की कुछ और है।

वृंदावन की दूरी मथुरा से करीब 10 किलोमीटर है। कहा जाता है कि वृंदावन में एक समय पर सिर्फ घना जंगल हुआ करता था। यहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन का आधे से ज्यादा समय बिताया है। मथुरा में जहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि फेमस है, तो वहीं वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ और राधा रमण मंदिर की अपनी एक अलग पहचान है।

कृष्ण जन्माष्टमी और होली के मौके पर तो यहां लाखों भक्तों की भीड़ जुटती है। आप सभी मथुरा वृंदावन जाकर दर्शन कर लौट आते होंगे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वृंदावन का इतिहास क्या है? इसकी खोज किसने की थी? अगर नहीं, तो ये लेख आपके लिए है। हम आपको बताएंगे कि वृंदावन का इतिहास क्या है। तो आइए जानते हैं विस्तार से

मथुरा का इतिहास
बताया जाता है कि मथुरा का इतिहास कोई 100-200 साल नहीं, बल्कि 2500 साल पुराना है। ये शहर यमुना नदी के तट पर बसा है। इसका उल्लेख ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं में भी किया जाता है। बता दें कि मथुरा को पहले मधुवन के नाम से जाना जाता था। उस दौरान यहां सिर्फ घने जंगल देखने को मिलते थे। हालांकि बाद में इसका नाम बदल दिया गया। इसे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है।

नदी के किनारे घाटों का हुआ निर्माण
मथुरा नगर निगम के मुताबिक, एक समय ऐसा भी था जब मथुरा के इतिहास में अंधकार छा गया था। हिंदू शासकों, अमीर व्यापारियों और सरदारों ने मंदिरों और नदी के किनारे घाटों का निर्माण करने की पहल की। आज के समय में ये शहर जहां एक पवित्र तीर्थनगरी है, वहीं ये पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी है।

वृंदावन का इतिहास
कहा जाता है कि वृंदावन की खोज चैतन्य महाप्रभु ने 1515 में की थी। चैतन्य महाप्रभु ने अपने शिष्यों को भी वृंदावन भेजा था और भक्ति का विस्तार करने के लिए कहा था। वृंदावन को मथुरा का जुड़वा शहर भी कहा जाता है। यहां भगवान कृष्ण ने अपना बचपन बिताया था। वृंदावन वन के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। ये वन यानी कि जंगल वृंदावन शहर से लेकर बरसाना और नंदग्राम तक फैला हुआ है। दूसरी तरफ इसके किनारों पर गोवर्धन भी है। इन जंगलों में राधा कुंड भी माैजूद है।

यहां भगवान कृष्ण ब्रज की सुंदर गोपियों संग रास नृत्य किया करते थे। वृंदावन ही वो जगह है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी को प्यार से रिझाया था। आपको बता दें कि वृंदावन को तुलसी का वन भी कहा जाता है। यहां तुलसी के बहुत ज्यादा पौधे हैं।

वृंदावन में मौजूद हैं ये मंदिर
प्रेम मंदिर

श्री पर्यावरण बिहारी जी का मंदिर

श्री राधारमण मंदिर

श्री राधा दामोदर मंदिर,

राधा श्याम सुंदर मंदिर

गोपीनाथ मंदिर

गोकुलेश मंदिर

श्री कृष्ण बलराम मंदिर

पागलबाबा का मंदिर

रंगनाथ जी का मंदिर

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धरती के ‘जादुई’ झरने! इनकी ऊंचाई देख उड़ जाएंगे होश https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147374/ Sat, 07 Jun 2025 16:45:11 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147374/

प्रकृति की सबसे सुंदर चीजों में से एक हैं झरने, जो ऊंचाई से गिरते हुए पानी की धारा के साथ बहुत ही अमेजिंग लगते हैं। ऐसे में दुनिया में कई झरने अपनी सुंदरता, जल प्रवाह और ऊंचाई के लिए फेमस हैं, लेकिन कुछ झरने अपनी ऊंचाई की वजह से खास पहचान रखते हैं। ये झरने न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि प्रकृति के पॉवर और खूबसूरती का जीवंत प्रमाण भी देते हैं। तो आइए, जानते हैं दुनिया के कुछ ऐसे ही सबसे ऊंचे झरनों के बारे में-

एंजेल फॉल्स (वेनेजुएला)
एंजेल फॉल्स की ऊंचाई 2648 फीट (979 मीटर) है। ये दुनिया का सबसे ऊंचा झरना है, जो वेनेजुएला के कैनैमा नेशनल पार्क में स्थित है। यह औयान-टेपुई पर्वत से गिरता है और इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण पानी हवा में ही धुंध में बदल जाता है। बारिश के मौसम में इसकी भव्यता और बढ़ जाती है।

तुगेला फॉल्स (दक्षिण अफ्रीका)
तुगेला फॉल्स 3,110 फीट (948 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है, जो ड्रेकेन्सबर्ग पर्वतों में स्थित है और अफ्रीका का सबसे ऊंचा झरना है। इस झरने का पानी कई स्तरों से होकर गिरता है, जिससे यह और भी अट्रैक्टिव दिखाई देता है।

ट्रेस हरमेनास फॉल्स (पेरू)
ये 2,999 फीट (914 मीटर)की ऊंचाई से गिरता है। इसका नाम “तीन बहनें” इसलिए रखा गया है,, क्योंकि यह तीन अलग-अलग चरणों में गिरता है। यह झरना पेरू के ओटिशी नेशनल पार्क में स्थित है और घने जंगलों से घिरा हुआ है।

ओलो’उपेना फॉल्स ( हवाई, यूएसए)
ये 2,953 फीट (900 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है जो हवाई के मोलोकाई द्वीप पर स्थित है और इसकी खासियत यह है कि इसे केवल हवाई मार्ग या समुद्र से ही देखा जा सकता है। यह चट्टानों से बहते हुए बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।

युंबिल्ला फॉल्स (पेरू)
ये 2,938 फीट (896 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है, जो एक चार-स्तरीय झरना है, जो अमेजन के घने जंगलों में स्थित है। इसकी सुंदरता और शांति इसे नेचर लवर्स के लिए खास बनाती है।

विन्नुफोसेन फॉल्स(नॉर्वे)
ये 2,822 फीट (860 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है, जो यूरोप का सबसे ऊंचा झरना है और ग्लेशियर्स के पिघलने से बनता है। गर्मियों में यह अपने चरम प्रवाह पर होता है और बर्फीली पहाड़ियों के बीच इसका झरता पानी इसे देखने में और ज्यादा सुंदर बनाता है।

बालाइफोससेन फॉल्स(नॉर्वे)
ये 2,789 फीट (850 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है। यह एक मौसमी झरना है, जो बर्फ के पिघलने पर अपनी पूरी भव्यता में नजर आता है। वसंत ऋतु में इसका पानी पूरे वेग से गिरता है, जिससे यह और भी शानदार दिखता है।

पु’उका’ ओकू फॉल्स (हवाई, यूएसए)
ये 2,756 फीट (840 मीटर) की ऊंचाई से गिरता है। यह भी हवाई के मोलोकाई द्वीप पर स्थित है और इसके इस स्थान पर होने के कारण इसे देख पाना मुश्किल होता है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और ऊंचाई इसे विशेष बनाती है।

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Ahmedabad के पास बसे हैं 4 खूबसूरत Hill Stations https://thelucknowtimes.com/NewsArticle/147376/ Sat, 07 Jun 2025 16:45:11 +0000 https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/147376/

गर्मियों में घूमने जाने वालों की संख्‍या बढ़ जाती है। आमतौर पर इस च‍िलच‍िलाती गर्मी से राहत पाने के ल‍िए Hill Stations लोगों का पसंदीदा ठ‍िकाना होता है। यहां के शांत वातावरण और ठंडी हवाओं से मन को सुकून म‍िलता है। आप ताजगी से भर जाते हैं। जब भी पहाड़ों पर जाने की बात होती है तब लोग श‍िमला-मनाली या फ‍िर नैनीताल और मसूरी जाना ही पसंद करते हैं।

हालांक‍ि, इन सबके अलावा भी ऐसे कई Hill Stations हैं जहां घूमने का मजा दोगुना हो जाता है। इनकी खूबसूरती भी देखने लायक होती है। अगर आप इस बार क‍िसी नए जगह पर जाने की प्‍लान‍िंग कर रहे हैं तो गुजरात हो आइए। यहां भी ऐसे कई ह‍िल स्‍टेशन हैं जो आपका मन मोह लेंगे। ये पहाड़ी इलाके बेहद खूबसूरत और शांत हैं। यहां आकर आपको अलग ही सुकून का एहसास होगा। ये अहमदाबाद से कुछ ही दूरी पर बसे हुए हैं।
आइए उन जगहों के बारे में जानते हैं व‍िस्‍तार से –

पावागढ़ ह‍िल स्‍टेशन
ये ह‍िल स्‍टेशन अहमदाबाद से 151 क‍िलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। यहां की खूबसूरती देखने लायक होती है। दूर-दूर से टूर‍िस्‍ट इस जगह का दीदार करने के ल‍िए आते हैं। यहां आपकाे ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और हरि‍याली देखने को म‍िलेगी। ये जगह गुजरात के पंचमहल में मौजूद है। आप यहां फैम‍िली, दोस्‍त या पार्टनर के साथ घूमने के ल‍िए जा सकते हैं।

सापुतारा हिल्‍स
अहमदाबाद से 397 क‍िलोमीटर की दूरी पर बसे सापुतारा ह‍िल्‍स की खूबसूरती देखते ही बनती है। मानसून में तो इस जगह की खूबसूरती और भी ज्‍यादा बढ़ जाती है। यहां आप सुरम्य जंगलों, पहाड़ियों और झील के सुंदर नजारों का मजा ले सकते हैं। यहां मानसून में पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। इसकी खास बात ये है क‍ि आप यहां एडवेंचर स्‍पोर्ट्स का मजा भी ले सकते हैं।

डॉन हिल स्टेशन
डॉन ह‍िल स्‍टेशन, अहमदाबाद से 394 क‍िलोमीटर दूर बसा हुआ है। यहां आपको आद‍िवासी के जमाने से जुड़ी कई चीजें देखने को म‍िल जाएंगी। आप यहां ट्रैक‍िंग का मजा भी ले सकते हैं। इसके अलावा यहां मौजूद वॉटर फाॅल्‍स आपका मन मोह लेंगे।

विल्सन हिल्स
इसकी ग‍िनती दुन‍िया के अनोखे ह‍िल स्‍टेशनों में से एक है। आप यहां से समुद्र का सुंदर नजारा भी देख सकते हैं। आप यहां Sunset Point भी जा सकते हैं। इसके अलावा कई झरने भी आकर्षण का केंद्र हैं। अहमदाबाद से इस ह‍िल स्‍टेशन की दूरी 363 क‍िलोमीटर है। ये ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद है।

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