चुनाव आयोग ने एसआईआर पर मांगी जनता की राय

वोट चोरी के आरोपों के बीच पूछे पांच सवाल
नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने पांच सवाल पूछकर एसआईआर पर जनता की राय मांगी है। इन सवालों में पूछा गया है कि क्या मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए या नहीं। मृत लोगों, दो या अधिक स्थानों पर मतदाता बने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने चाहिए या नहीं। चुनाव आयोग ने जनता से इस बात पर भी अपनी राय देने के लिए कहा है कि क्या दूसरे स्थान पर चले गए लोगों या विदेशी लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने चाहिए, या नहीं? ये वही बुनियादी सवाल हैं जिनको लेकर चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम किया है। राजनीतिक विज्ञान के विशेषज्ञ धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट करना चुनाव आयोग का दायित्व है। इसके लिए संविधान में उसे शक्ति और जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन आज चुनाव आयोग ने जो सवाल पूछे हैं, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं चुनाव आयोग विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को लेकर दबाव में है। वह अपनी छवि बचाने के लिए सीधे जनता के दरबार में पहुंच गया है।
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि देश की राजनीति के लिए यह तस्वीर सही नहीं है। किसी भी संवैधानिक संस्था का कार्य राजनीति का विषय नहीं बनना चाहिए। देश के स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यही आवश्यक है कि हर संवैधानिक संस्था अपने-अपने दायित्यों को पूरा करे। यह प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए कि इस पर किसी को कोई संदेह न हो। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता राजनीतिक तौर पर बहुत परिपक्व है। यदि किसी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटेगा तो बिहार का मतदाता इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा और इसको लेकर बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो सकता है। लेकिन इस मामले पर जनता की तरफ से अब तक कोई विरोध न होना इस बात का प्रमाण है कि जनता को एसआईआर से कोई शिकायत नहीं है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उसका भरोसा बरकरार है।