यहां कुर्सी पर बैठने से पहले बाबा के दर्शन करते हैं थानेदार

कोतवालेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से दूर होती हैं व्याधियां
सिमरन पाठक सिटीजन जर्नलिस्ट

लखनऊ : राजधानी के चौक कोतवाली में भगवान महादेव का भव्य मंदिर है। कोतवाली परिसर में सुशोभित कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में सावन महीने में हर सोमवार को बाबा का विशेष श्रृंगार और पूजन होता है। सावन भर यहां श्रृंगार और रुद्राभिषेक के लिए बुकिंग फुल रहती है। मंदिर परिसर में बजरंगबली भी विराजमान हैं, जो भक्तों में भय का नाश करते हैं। महादेव और बजरंगबली के दर्शन से भक्त यहां आकर एक अलग ही शांति का अनुभव करते हैं। यहां चौक कोतवाली में आने वाले हर अधिकारी बाबा के दर्शन के बाद ही कुर्सी पर बैठते हैं।
1905 में किया गया था मंदिर का जीर्णोद्धार
चौक के कोतवालेश्वर मंदिर की स्थापना की सही तिथि की जानकारी नहीं है। लखनऊ के नवाबों की जमीन पर स्थापित मंदिर का जीर्णोद्धार 1905 में किया गया था। सिद्धपीठ के रूप में प्रख्यात इस शिवालय में दर्शन के लिए दूरदराज से लोग आते हैं। सावन के हर सोमवार को विशेष पूजा होती है। सावन के अंतिम सोमवार को उज्जैन की तर्ज पर कोतवालेश्वर महादेव के भ्रमण की यात्रा निकलती है। इस यात्रा में घोड़, ऊंट, घोड़े, बैंड के साथ ही शिव भक्त नृत्य करते हुए चलते हैं। डमरू की धुन के बीच महादेव बाबा भक्तों को दर्शन देने आते हैं। नगर भ्रमण की तैयारी के लिए अलग-अलग टोलियां बनाई जाती हैं।
बाबा के दर्शन को दूरदराज से आते हैं भक्तगण
महंत विशाल गौड़ बताते हैं कि सावन भर प्रतिदिन सुबह जलाभिषेक से पूजन की शुरुआत होती है। शाम आठ बजे से रात दस बजे तक हर रात रुद्राभिषेक होता है। हर वर्ष सावन के अंतिम सोमवार को कोतवालेश्वर महादेव नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। व्यवस्थापक अजय अग्रवाल के अनुसार सावन मास में खास श्रृंगार के साथ ही ओम नम: शिवाय का जाप होता है। मान्यता है कि सावन मास में कोतवालेश्वर बाबा के दर्शन से व्याधियां दूर हो जाती हैं, इसलिए भी दूरदूराज से भक्तगण यहां दर्शन के लिए आते हैं।

सावन के अंतिम सोमवार को हुई विशेष पूजा अर्चना
सावन के अंतिम सोमवार पर कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया। ब्रहा योग, इंद्र योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्घि योग और गुरु शुक्र की युति से गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण होने से इसका विशेष महत्व रहा। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का आना शुरु हो गया था। भक्तों ने शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, घी, दही, चीनी, मिश्री, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया। महंत विशाल गौंड ने बताया कि शिवलिंग पर इन वस्तु से अभिषेक करते हैं तो इससे कई तरह के लाभ भी मिलते हैं। भक्तों ने शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का जप किया। हिंदू धर्म में इस मंत्र का विशेष महत्व है और माना जाता है कि इसमें भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की शक्ति है। सुबह से भारी वर्षा में भी भक्तों का मंदिर में अभिषेक के लिए आना कम नहीं हुआ। सोमवार सावन का महत्वपूर्ण दिन होता हैं क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित होता है।