यहां से यमराज को भी लौटना पड़ा था, बेलपत्र चढ़ाने से पूरी होती है मुराद

पूर्वांचल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मार्कंडेय महादेव मंदिर
–सिमरन पाठक

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा अत्यंत शुभ और शीघ्र फल देने वाली मानी गई है। यही कारण है कि इस पावन महीने में देश के शिवालय में शिवभक्तों की भारी भीड़ दर्शन और पूजन के लिए पहुंचती है। शिव के प्रमुख पावन धाम में से एक है मार्कंडेय महोदव मंदिर, जो कि बाबा विश्वनाथ की नगरी से महज 30 किमी की दूर वाराणसी—गाजीपुर राजमार्ग पर कैथी में स्थित है। गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में सावन के महीने में भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस मंदिर का इतिहास अद्भुत है। मार्कंडेय महादेव मंदिर पूर्वांचल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लाखों भक्त जलाभिषेक करने के लिए मार्कंडेय महादेव मंदिर में आते हैं। सावन माह में यहां एक माह का मेला लगता है। मार्कंडेय महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में से एक है। विभिन्न प्रकार की परेशानियों से ग्रसित लोग अपने दुःखों को दूर करने के लिए यहां आते हैं।

मार्कंडेय महादेव की पौराणिक कथा
मान्यता है कि एक बार नि:संतान मृकण्ड ऋषि तथा उनकी पत्नि मरन्धती को किसी ने व्यंग्य करके अपमानित किया कि बगैर पुत्र के उनका वंश नहीं बढ़ पाएगा तो उन्होंने संतान की कामना से पहले ब्रह्मा जी की तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने बताया कि उनके भाग्य को सिर्फ भगवान शिव बदल सकते हैं, फिर उन्होंने महादेव की कठिन तपस्या की और उनसे पुत्र प्राप्ति का वरदान पाया, लेकिन भगवान शिव ने साथ में यह भी कहा कि उनका पुत्र सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा. इसके बाद उनके यहां मार्कंडेय नाम से संतान हुई। कुछ साल बीतने के बाद जब मार्कंडेय को अपनी अल्पायु के बारे में पता चला तो उसने उन्हीं महादेव के लिए तप करना शुरु किया जिनके आशीर्वाद से उनका जन्म हुआ था. फिर भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दीर्घायु प्रदान की और यमराज को 12 साल की उम्र पूरी होने पर बगैर उनके प्राण लिए ही लौट जाना पड़ा।

पूजा से पूरी होती है संतान सुख की कामना
मां गंगा और गोमती के तट पर स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर के बारे में मान्यता है कि कभी इसी स्थान पर राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था. मान्यता है कि महादेव के इस पावन धाम पर विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति की संतान से जुड़ी कामना शीघ्र ही पूरी होती है. यही कारण है कि यहां पर देश के कोने-कोने से लोग अपनी इस कामना को लिए मार्कंडेय महादेव के मंदिर में पहुंचते हैं। अपने भक्तों की पूजा से शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले महादेव के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यदि कोई भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रावण मास में शिवलिंग पर एक लोटा गंगाजल और राम नाम लिखा बेलपत्र चढ़ा दे तो उसकी बड़ी से बड़ी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है। मान्यता है कि मार्कंडेय महादेव की पूजा से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है और शिव की कृपा से उसे लंबी उम्र का वरदान मिलता है।