हर हिंदू की सुरक्षा भारत की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए : आचार्य शांतनु महाराज

बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थितियों पर खुलकर बोले आचार्य, कहा- वैश्विक मंच पर भारत सरकार को हिंदुओं की रक्षा को निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता
लखनऊ : विगत कुछ महीनों में सहिष्णु, उदारमना और आस्थावान हिन्दू समाज पर हमले बढ़े हैं। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में हिंदू समाज अपने ऊपर होने वाला अत्याचार झेलने को अभिशप्त है। वैश्विक मंच पर भारत सरकार को हिंदुओं की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है। उक्त बातें विख्यात श्रीराम कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज ने कहीं। वह रविवार को गोमतीनगर स्थित दयाल गेटवे कन्वेंशन सेंटर में वरिष्ठ पत्रकारों के साथ अनौपचारिक वार्ता में कर रहे थे।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि ‘हर हिंदू की सुरक्षा, चाहे वह कहीं भी निवास करता हो, भारत की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।’ पत्रकारों के साथ संवाद में आचार्य शांतनु महाराज ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति, भारतीय संस्कृति और वैश्विक हिंदू समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। आचार्य शांतनु ने पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि लगातार हो रही अराजकता, अपराध और हिंसा से वहां आमजन भयभीत है। इस पर उन्होंने राष्ट्रपति शासन लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि राज्य में संविधान का शासन और नागरिक अधिकारों की पुनः स्थापना हो सके। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कार्रवाई को पर्याप्त और जरूरी बताया।
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की प्रवाह
दयाल गेटवे कन्वेंशन सेंटर में रविवार शाम को ‘श्रीमद् भागवत कथा’ का शुभारंभ प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज के श्रीमुख से शुरू हुआ। कथा 9 अगस्त तक प्रतिदिन सायं 5 से 8 बजे तक खुले मंच पर होगी। प्रथम संध्या में ही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। पूज्य आचार्य शांतनु महाराज के श्रीमुख से बाह रही श्रीमद्भागवत कथा की सरिता आध्यात्मिक जागरण के साथ सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संदेश का सशक्त मंच बन गई है। व्यास पीठ से दिए अनुपम विचार लोकहित और राष्ट्रीय एकता की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

व्यासपीठ की अपनी मर्यादा रेखा, इसे लांघना नहीं चाहिए
आचार्य शांतनु महाराज ने कहा व्यासपीठ की अपनी मर्यादा रेखा होती है, इसे लांघना नहीं चाहिए। व्यासपीठ पर बैठे आचार्य को आत्मानुशासन, सौहार्दपूर्ण संवाद और सामाजिक सजगता का स्मरण रखना चाहिए। पत्रकारों के सवालों का उत्तर देते हुए महाराज श्री ने चेताया कि सभी संत-महापुरुषों को विवादास्पद बयानबाजी से बचना चाहिए। धर्म-समाज को एकजुट रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विशेषकर अनिरुद्धाचार्य महाराज को भी यही सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि समाज हमारे आचरण से प्रेरणा लेता है, इसलिए हमारी दोहरी जिम्मेदारी बनती है।
उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव की सराहना
आचार्य शांतनु महाराज ने योगी आदित्यनाथ सरकार के आठ वर्षों की जोरदार सराहना करते हुए इसे ‘महापरिवर्तन’ का काल बताया। उन्होंने कहा, ‘अल्पकाल में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रांत में प्रत्येक वर्ग एवं नागरिक आज खुद को सुरक्षित महसूस करता है। अपराध और भ्रष्टाचार पर नकेल कसी गई है, जिससे आमजन को आत्मविश्वास एवं सुरक्षा का नया भाव मिला है।’ उन्होंने मुफ्त राशन, महिला सुरक्षा, पुलिस भर्ती, मेडिकल कॉलेज, कानून-व्यवस्था और डिजिटल निगरानी जैसी सरकारी उपलब्धियों को जनता के प्रति समर्पित शासन का प्रमाण बताया।
ऐतिहासिक नाम बदलने और पुनर्लेखन की वकालत : आचार्य शांतनु महाराज ने लखनऊ, आजमगढ़, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फिरोजाबाद, ग़ाज़ीपुर जैसे नगरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित करने तथा इतिहास के सही पुनर्लेखन की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने रामायण और महाभारत में उल्लेखित नगरों के प्राचीन गौरव को समाज के समक्ष पुनः रखने की आवश्यकता उजागर की।