अनुभव का लाभ लेने की बजाय शुभांशु को बना दिया उत्पाद!

–अनिल सिंह
लखनऊ : अंतरिक्ष से लौटने के बाद अपने गृह जनपद पहुंचने पर शुभांशु शुक्ला का भव्य स्वागत किया गया, भारी भरकम जुलूस निकाला गया। शुभांशु के पहले भी और कई लोग स्पेस स्टेशन गये थे, लेकिन उनका कोई जुलूस नहीं निकला। जुलूस देखकर ये तीनों इनफिरियॉरिटी कॉम्पलेक्स से मर जायेंगे। शुभांशु का जुलूस निकालने की बजाय उनका किसी बड़े ऑडिटोरियम में सेशन रखा जाता, जिसमें तमाम स्कूलों के बच्चे सवाल जवाब करते और प्रोत्साहित होते, विज्ञान एवं रिसर्च में उनकी दिलचस्पी बढ़ती, लेकिन ‘छोटी’ मानसिकता की वजह से शुभांशु के अनुभव का लाभ लेने की बजाय उन्हें उत्पाद बना दिया गया है और उनकी उपलब्धि को तमाशा।

अमरीका की डॉ. पेगी व्हिटसन भी गईं थी, जो मिशन की कमांडर थीं। अंतरिक्ष में 675 दिन बिता चुकी हैं। उन्होंने 60 घंटे 21 मिनट के 10 स्पेसवॉक भी किए हैं। यह उनका दूसरा प्राइवेट अंतरिक्ष मिशन था। सावोज उज्नांस्की पोलैंड और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का प्रतिनिधित्व करने वाले भौतिक विज्ञानी और इंजीनियर हैं। 1978 के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले पोलैंड के दूसरे अंतरिक्ष यात्री थे। हंगरी के टिबोर कापू पॉलीमर प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विकिरण सुरक्षा में विशेषज्ञता रखने वाले मैकेनिकल इंजीनियर एवं मिशन के एक्सपर्ट हैं। कापू 1980 के बाद अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले हंगरी के दूसरे एस्ट्रोनॉट थे।