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दुर्लभ रोग राष्ट्रीय नीति 2021 को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को दुर्लभ रोग राष्ट्रीय नीति 2021 को मंजूरी दे दी। इस नीति के तहत दुर्लभ रोग से ग्रस्ति लोगों के उपचार पर अब राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना से 20 लाख रुपये खर्च किए जा सकेंगे। इस नीति के अनुसार आनुवांशिक रोग, विरले कैंसर, संक्रामक ऊष्ण कटिबंधीय रोग, क्षयकारी रोग आदि दुर्लभ रोग के श्रेणी में आते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस नीति को अपने वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। भारत में सबसे अधिक पाए जाने वाले दुर्लभ रोग में हीमोफिलिया, थैलसीमिया, सिकल-सेल एनीमिया, बच्चों में प्राथमिक इम्युनो की कमी, ऑटो-इम्यून रोग, लाइसो सोमल स्टोरेज विकृतियाँ, जैसे – पोम्पे डिजीज, हिर्स्चप्रंग रोग, गौचर की बीमारी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, हेमांगीओमास और कुछ प्रकार के मस्कुलर डिस्ट्रोफी शामिल है। इस राष्ट्रीय नीति के अनुसार, जो दुर्लभ रोग एक ही बार उपचार से ठीक हो सकता है उसके लिए उससे ग्रस्त रोगी को राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना से 20 लाख रु. दिए जाएंगे। यह लाभ सिर्फ गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों को ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के 40 प्रतिशत लाभार्थियों को भी मिलेगा।

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