मुख्य समाचारराज्य

HSI ग्रुप ने 1 लाख से ज़्यादा बेसहारा कुत्तों की नसबंदी की, कई शहरों में दी सेवाएं 

-चारु खरे 

नवाबों के शहर ‘लखनऊ’ में ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल (एचएसआई) ग्रुप ने लखनऊ नगर निगम के साथ मिलकर, 12,000 से ज़्यादा कुत्तों की नसबंदी की है. हालांकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो एचएसआई के इस कदम से सहमत नहीं होते हैं, और उनके इस काम का विरोध भी करते हैं, लेकिन एचएसआई का मकसद है, बेसहारा कुत्तों की जनसंख्या को कम करके उनकी जिंदगी को बेहतर बनाना. The Lucknow Times ने कुत्तों की नसबंदी व इस पूरी प्रक्रिया के बारे में एचएसआई से समझा और उनसे बातचीत की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

नगर निगम के साथ मिलकर करता है काम : एचएसआई, नगर निगम के साथ मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करता है. अभी लखनऊ नगर निगम के साथ मिलकर, शहर में काम कर रहा एचएसआई ग्रुप, 12 हज़ार से ज़्यादा कुत्तों की नसबंदी कर चुका है. इसके लिए, लखनऊ नगर निगम ने शेल्टर बनाया है जहां एचएसआई बेसहारा कुत्तों को नसबंदी के लिए लाता है, और नसबंदी व टैगिंग हो जाने के बाद, उन्हें वापस उनके संबंधित क्षेत्र में छोड़कर आता है. बता दें कि नगर निगम ने टेंडर के माध्यम से एचएसआई को इस काम के लिए चुना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके लिए फ़ंड भी जारी किया था जिसकी मदद से, निगम हर एक कुत्ते के लिए 999 रुपये एचएसआई ग्रुप को देता है.

फ़रवरी 2021 में निःशुल्क कैंप का किया गया था आयोजन :   फ़रवरी 2021 में , बड़ौदा के वाघोड़िया इलाके में स्थित पशु जन्म नियंत्रण सेंटर पर ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल (एचएसआई)/ इंडिया ने एक निःशुल्क कैंप का भी आयोजन कराया था. यह कैंप मुख्य रूप से अपने इलाके के कुत्तों की देखभाल कर रहे और पशु जन्म नियंत्रण को प्रोत्साहित कर रहे समुदाय के कार्यरत सदस्यों को ध्यान में रखकर लगाया गया था. इस कैंप में कई कुत्तों का बंध्याकरण और रेबीज टीकाकरण किया गया. एचएसआई इंडिया के डायरेक्टर केरन नेज़रथ ने लखनऊ में ऐसे कई लोगों की सराहना भी की थी जो अपने इलाके में कुत्तों की देखभाल करते हैं और पशु जन्म नियंत्रण को लेकर सहज सोच रखते हैं.

1 लाख 50 हज़ार कुत्तों का हो चुका है बंध्याकरण : 

समाज में ऐसे कई लोग हैं जो एचएसआई के इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं. उनका मानना है यह एक तरह की ज़्यादती है, लेकिन वहीं कुत्तों की देखभाल कर रहे लोगों की मानें तो यह एक बेहतर कदम है कुत्तों की जान को बचाने और उन्हें जीवित रखने का. भारत में यह काम  साल 2013 से शुरू होने के बावजूद देशभर के कई शहरों में करीब 1 लाख 50 हज़ार कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण किया जा चुका है.

अभय संकल्प क्या है? अभय संकल्प समुदाय द्वारा चलाया गया एक तरह का कार्यक्रम है जिसका मकसद इंसानों और कुत्तों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना है. हमें चाहिए कि हम आगे से आगे बढ़कर इस संकल्प में हिस्सा लें. इसकी टैगलाइन है ‘अभय बनो, अभय बनाओ’. इसकी मदद से लोग कुत्तों से डरने के बजाय उन्हें समझने पर गौर देना शुरू कर रहे हैं. एचएसआई ग्रुप की श्रुति के अनुसार, कई बार कॉलोनी के कुत्तों को पकड़ना और सोसाइटी के लोगों को समझाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन फिर भी हम और हमारी टीम इस काम को बेहद ही सरल तरीके से करने की कोशिश करती है जिससे कुत्ते उग्र व्यवहार न करें और लोग उनसे मित्रता करने की हर संभव कोशिश करें।

Show More

Related Articles