आफत से इतर एक बहुत बड़ी राहत दे गया चक्रवाती तूफान!

शुभ संदेश : वायुमंडल से छंटा प्रदूषण, जल्द काबू होगा कोरोना

प्रकृति ने घरों में कैद लोगों को दी तीन गुनी अच्छी गुणवत्ता की हवा

-डी.एन. वर्मा

डॉ.भरत राज सिंह
महानिदेशक (तकनीकी)
एसएमएस, लखनऊ

लखनऊ : कोरोना महामारी मार्च 2021 से आयी द्वितीय लहर व भारत के तटीय क्षेत्रों में मई 2021 में आये प्रलयकारी चक्रवात (ताउते व यास) अपने पीछे एक संदेश भी छोड गये। इसका भरपूर आनंद लखनऊवासी आनंद उठायें। यह विचार स्कूल आफ मैंनेजमेंट साईसेज, लखनऊ के महानिदेशक व वरिष्ठ पर्यावरणविद, डा. भरत राज सिह ने अपने शोध के माध्यम से दिया है। उनका कहना है कि कुछ दिन पूर्व (मई के 15 दिनों में) पहले हिंद महासगर में एक उष्णकटिबंधीय अशांति होने से ताउते चक्रवात उत्पन्न हुआ, जिसकी सूचना 13 मई 2021 को भारत के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दी गई, जिसे पूर्व की ओर बढ़ता बताया गया और जो 14 मई तक एक बृहत चक्रवात में बदल गया। तूफान ने जल्द ही उत्तर की ओर मोड़ लिया, धीरे-धीरे तेज हो गया, और यह प्रक्रिया एक चक्रवाती तूफान में परिवर्तित हो गया। उसी दिन इसका नाम ताउते रखा गया। यह ताउते 15 मई 2021 को तेज गति में अरब सागर की तरफ आगे बढने लगा और 16 मई को एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में बदल गया। फिर ताउते, केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के भारतीय राज्यों के तट के समानांतर बढता गया। 17 मई की शुरुआत में, ताउते एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में तेज हो गया, जो अपनी चरम तीव्रता तक पहुंच गया। उसी दिन, ताउते ने एक नेत्रगोलक प्रतिस्थापन चक्र से गुजरना शुरू कर दिया और 18 मई को गुजरात के तट के निकट टकराया। इसके बाद, ताउते धीरे-धीरे कमजोर हो गया और उत्तर-पूर्व अंतर्देशीय क्षेत्र की ओर बढ़ गया तथा 19 मई को, एक चिह्नित कम दबाव वाले क्षेत्र में कमजोर हो गया।

मुम्बई नगर निकाय ने 19 मई 2021 बुधवार को बताया था कि ताउते जो बेहद भीषण चक्रवाती तूफान था उसके कारण पूरे मुंबई में 812 पेड़ उखड़ गए। मुंबई पुलिस इस बात की भी पुष्टि की कि सोमवार शाम को मुंबई तट पर पी-305 नौका चक्रवात ताउते की चेतावनी के बावजूद प्रभावी इलाके में रुके होने से डूब गया, जिस नौका पर सवार 22 लोगों की आकस्मिक मौत की रिपोर्ट भी दक्षिण मुंबई की येलोगेट पुलिस ने बुधवार को दर्ज की और उनके शव बरामद कर लिए जाने की सूचना भी दी। ‘पापा-305’ (पी-305) बजरा में 261 लोग सवार थे। इनमें से 186 लोगों को बचा लिया गया जबकि 53 लोगो के भी लापता होने व 22 (बाईस) की मौत की पुष्टि की गई। गुजरात में भी काफी तवाही का नजारा रहा । केरल, कर्नाटक, गोवा, मुंबई, गुजरात व आस-पास के राज्यो में भी वारिस से जन-जीवन अस्त-ब्यस्त हो गया। आइये चक्रवात के पश्चात प्रकृति में हुये बदलाव की एक जानकारी जो लखनऊ के शोध आकणॉ से मिली है, लेवे ।

चूंकि ताउते चक्रवात 13 मई 2021 को शुरू होकर केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात में 16 से 19 मई 2021 तक तवाही मचाया था कि उसी के तुरंत बाद, दूसरा चक्रवात यास ने भी ओडीशा के तटीय क्षेत्रो से 26-27 मई 2021 को टकराकर ओडीशा व पश्चिम बंगाल में तवाही का तांडव पैदा किया| परन्तु कभी हमने इसके सकारात्मक पहलू पर सम्भवतः ध्यान ही नही दिया । मैने इस बीच लखनऊ के हवा की गुणवत्ता का प्रतिदिन निरीक्षण किया और जिसका आकडा नीचे तालिका में दिया गया है ।

भारत सरकार मौसम विज्ञान विभाग द्वारा कोरोना महामारी के प्रथम लहर के शांत होने के समय लगभग 7 जनवरी 2021 को लेख से सूचना दी गई थी कि देश में 1 जनवरी 2021 को हवा की गुणवत्ता बहुत खतरनाक स्तर पर 406 थी, जो 6 जनवरी 2021 को 366 (बहुत खराब) और 7 जनवरी 2021 को 183 (सीमित स्तर) पर बहुत दिनो बाद आई है। चूंकि हवा की गुणवत्ता = 50 को बहुत अच्छा माना जाता है तो कोरोना के दौरान वाहनो के उपयोग सीमित होने और दो-दो चक्रवाती तूफानो से मौसम में वारिस होने से ग्रीन हाउस गैसे में बहुत कमी अर्थात वातावरण में नगन्य हो गई। इसके कारण वायु मंडल की हवा में आक्सीजन की मात्रा बहुत अच्छे 50 से 28-31 मई 2021 में सुबह 6-8 बजे तक रही है। जो आवश्यक मात्रा से दो से तीन गुना अधिक है। अतः लखनऊ के नगर वासियो से आग्रह है कि वह इस मौसम का आनंद उठायें क्योकि जिस आक्सीजन कमी ने हमारे अपनो को बहुत दुख देकर हमसे हमेशा के लिये जुदा कर दिया, वही आक्सीजन जब वातावरण में 2-3 गुना मात्रा में है, का उपयोग सुबह (6-8 बजे) पार्कों, घर के छतों व खुले स्थानों पर टहलकर स्वास्थ्य लाभ ले। यह स्थिति चूंकि मानसून भी समय पर आने की पूर्ण आशा है, अगले महीनों में भी मिलती रहेगी।

प्रोफ. भरत राज सिंह का शासन से भी अनुरोध है कि प्रकृति के इस भयावह चेतावनी को दृष्टिगत रखते हुये निजी-वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण हेतु शासकीय विचार विमर्शकर नई-नीति लाये और भरपूर मात्रा में फलदार पेड़ों को शहर व उनकी सड़कों के किनारे लगवाने की प्रथमिकता पर जोर दे। हाई-वे, सुपर एक्सप्रेस्स-वे व जनपदीय सड़कों पर भी पेड़ लगवाने भी एक नीति बनाकर कार्यवाही की जाय। उनका यही 30 मई 2021 के ऊर्जा सरंक्षण दिवस का प्रदेश/देशवासियो के लिए एक संदेश है।

Related Articles