कोरोना का कहर या दहशत का माहौल!

सावधानी में ही बचाव, अफवाहों से दूर रहने की जरूरत

डॉ. भरत राज सिंह,
महानिदेशक (तकनीकी)
एसएमएस, लखनऊ

लखनऊ : वास्तव में कोरोना का कहर मुख्यतः चीन से शुरू हुआ और पूरे विश्व में जिस तेजी से फैल रहा है, यह एक चिंता का विषय है। चीन में लाखो की आबादी इससे प्रभावित हुई है और पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। लोगों को अलग–थलग कर इसके आगे न फैलाने के इंतजाम किये जा रहे है। प्रभावित लोगों को अलग—अलग उपचार केंद्र में रखा जा रहा है। कई शहर को अलग कर दिए गए हैं। इसका प्रभाव केवल वरिष्ठजनों पर अधिक पड़ रहा है। इसके अलावा कोरोना से इटली दूसरा सबसे प्रभावित देश हो गया है। अमेरिका में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ईरान और ईराक की बहुतायत संख्या इससे प्रभावित है। आज आस्ट्रेलिया में आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अगले 15-दिनों तक न कोई किसी देश से आस्ट्रेलिया आ सकता है और नहीं कोई आस्ट्रेलिया से बाहर जा सकता है। ऐसे में, भारतवर्ष में जहां 80-90 लोगों को इससे प्रभावित होने की आशंका में उपचार केंद्रों में रोका गया है और जिनमें से दो की अभी तक मौत की सूचना अधिकारिक रूप से घोषित की गई है, जिनकी उम्र 62-76 वर्ष थी, परन्तु भारतवर्ष में, स्कूल/ कालेजों को कही–कही 31 मार्च तक और उत्तर-प्रदेश में प्रथम चरण में 22 मार्च तक बंद कर दिया गया है। आज जहां देश की अर्थ-व्यवस्था पहले से चरमराई हुई है, वहां पर बंदी के इस माहौल में भारतवर्ष कितने पीछे जा सकता है, शायद अभी लोगों द्वारा अनुमान नहीं लगाया जा सका है।

मेरा स्वयं का मानना है कि हमें दहशत के इस माहौल को ख़त्म करने का प्रयास करना चाहिए। हां, जो लोग विदेश से भारतवर्ष आ रहे हैं, उनके कोरोना प्रभावित होने की पुष्टि और प्रभावित पाए जाने की दशा में उनकी देखरेख के लिए उन्हें स्वास्थ्य केंद्र में रोकने व ठीक होने तक बने रहने की व्यवस्था आवश्यक होनी चाहिए। परन्तु जो भारतीय अपने देश में ही अपने कारोबार व नौकरी हेतु भ्रमण कर रहे है, उनमें पैदा हो रही दहशत को ख़तम करने की आवश्यकता है। कार्यालय, शिक्षण संस्थाओ और व्यापार-स्थलों को प्रतिबंधित करना देशहित में नहीं है बल्कि इसे दहशत पैदा करने की श्रेणी में रखा जाना चाहिए और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने से कम नहीं आका जाना चाहिए। आज जरुरत है कोरोना प्रभावित-देशों की मदद करने की, परन्तु अपने देश की चरमराई अर्थव्यवस्था की गम्भीरता को ध्यान में रखकर। एक तरफ, बाजार से धीरे-धीरे खाद्यान-सामाग्री भी अधिक दरों पर बिकने लगी है, सब्जियों का दाम बढ़ता जा रहा है, व्यापार ठप हो रहा है, वही दूसरी तरफ प्रकृति की मार किसानों पर पहाड़ बनकर टूट पड़ी है।

आज जब गेहूं आदि अन्न की फसलें तैयार होने के कगार पर थी, वहीँ तूफानी बारिश और ओला-वृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ रखी है और ऐसी स्थिति अभी पूरे मार्च ही क्या, अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक बने रहने से इनकार नहीं किया जा सकता है। आज कोरोना से लड़ना है परन्तु अफवाहों से दूर रहकर तथा प्राथमिक सावधानी को अपनाते हुए। वही वरिष्ठजनों को विशेष रूप से देखभाल करने की भी आवश्यकता है।

 

 

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